Friday, December 2, 2016

एनजीटी(NGT) ने कार्यवाही में हिंदी पर लगाया प्रतिबंध : कहा - सुनवाई में केवल अंग्रेजी भाषा ही मान्य !!

एनजीटी(NGT) ने कार्यवाही में हिंदी पर लगाया प्रतिबंध :
कहा - सुनवाई में केवल अंग्रेजी भाषा ही मान्य !!
एनजीटी एक बार फिर से चर्चा में आ गया है पहले श्री श्री पर जुर्माना लगाने पर काफी चर्चा में आया था , अब हिंदी की याचिका पर रोक लगाने से फिर से चर्चा में आ गया है ।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अपनी कार्यवाही के दौरान हिंदी पर प्रतिबंध लगाते हुए साफ किया है कि वह वादी जो उनके समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होते हैं वह अपने दस्तावेज केवल अंग्रेजी में ही प्रस्तुत करें।
हरित पैनल ने कहा कि 2011 एनजीटी (चलन एवं प्रकिया) नियमों के नियम 33 के अनुसार अधिकरण की कार्यवाही केवल अंग्रेजी में ही होनी चाहिए।
अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के राष्ट्रीय महामंत्री श्री मुकेश जैन की वह याचिकाएं जिसके अंग्रेजी में न होने के कारण उन्हें एनजीटी ने अस्वीकार कर दिया था, उन पर पुनर्विचार करने के लिए दायर की गई समीक्षा याचिका की सुनवाई के दौरान यह स्पष्टीकरण दिया गया है।

एनजीटी(NGT) ने कार्यवाही में हिंदी पर लगाया प्रतिबंध : कहा - सुनवाई में केवल अंग्रेजी भाषा ही मान्य !!

न्यायाधीश यूडी साल्वी की अध्यक्षतावाली बेंच ने कहा, ‘‘दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ता को यह भम्र था कि हिंदी के राष्ट्रीय भाषा होने के चलते अधिकरण हिंदी की याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा।
हालांकि अब यह भ्रम दूर कर दिया गया है और उन्हें समझ में आ गया है कि 2011 एनजीटी (चलन एवं प्रकिया) नियमों के नियम 33 के अनुसार एनजीटी के काम केवल अंग्रेजी में ही होंगे ।’’
उन्होंने कहा कि, ‘‘इन याचिकाओं और रिकार्डो पर विचार करते हुए, जिनके वास्तविक अंग्रेजी संस्करण 24 सितंबर 2015 को दायर किए गए थे, हम उन याचिकाओं को स्वीकार करते हैं और उन्हें फाइल में बहाल करते हैं।
हालांकि वे सभी हिंदी याचिकाएं जो अपने अंग्रेजी अनुवाद के बिना दायर की गई थी, उन्हें अस्वीकार किया जाता है ।’’
आखिर क्या था मामला...???
दारा सेना के महामंत्री मुकेश जैन
द्वारा हिन्दी में दायर याचिका संख्या 195ध्2016 जिसमें दिल्ली सरकार की सम विषम वाहन योजना को रद्द करने की मांग राष्ट्रीय हरित अधिकरण से की गयी थी,क्योंकि सम विषम योजना में करोड़ों रुपये बर्बाद करने के बाद भी वायु प्रदूषण में कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि इस योजना के कारण परेशानी ही झेलनी पड़ रही है।
किन्तु हरित अधिकरण के न्यायधीशों सर्व श्री एम.एस नाम्बियार और विक्रम सिंह साजवान ने इस याचिका का अंग्रेजी अनुवाद देने का याचिकाकर्ता श्री मुकेश जैन को आदेश दिया।
अखिल भारतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच !!
इस मामले में याचिका कर्ता अखिल भारतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के महामंत्री श्री मुकेश जैन ने कहा कि हरित अधिकरण में राजभाषा हिन्दी को लगातार प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा है। जिसकी शिकायत हमने भारत सरकार के राजभाषा विभाग में भी की हुई है।
इस मामले में गत 18 मार्च को जब श्री मुकेश जैन ने अधिकरण के अध्यक्ष श्री स्वतन्त्र कुमार से भारतीय राजभाषा नियम 1976 के तहत हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री स्वतन्त्र कुमार से आदेश हिन्दी में देने का विनम्र अनुरोध किया था तो श्री स्वतन्त्र कुमार ने इसे न्यायालय की अवमानना मानकर श्री मुकेश जैन के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट निकाल गिरफ्तार कराया था ।
लेकिन उनका कहना है कि हम हरित अधिकरण के इन अत्याचारों, गिरफ्तारी और प्रताड़ना से न दबने वाले और न ही टूटने वाले हैं।
हरित अधिकरण को हम अपनी याचिका का अंग्रेजी अनुवाद किसी भी हालत में नहीं देंगे। अधिकरण को जो कुछ भी करना हो कर ले। अधिकरण अपनी बन्दर घुडकियों से श्री श्री रविशंकर जी को डरा सकता हैं हम डरने वाले नहीं।
हिन्दी में दायर की याचिकाएं खारिज करने के मामले ने तूल पकड़ा !!
जब दोबारा एनजीटी ने 26 अक्टूबर 2016 को हिंदी में याचिका खारिज कर दी तो दिल्ली में अखिल भारत हिन्दू महासभा भवन में आयोजित हिन्दी और हिन्दू संगठनों की बैठक हुई । उसमें अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच और अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक जी के नेतृत्व में निर्णय लिया गया कि राजभाषा हिन्दी विरोधी राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ईंट से ईट बजाकर देशद्रोही ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा।
बैठक में श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा हिन्दी में दायर की गयी याचिकाओं को फिर से निरस्त करना अधिकरण की गुंडागर्दी बताते हुए सरकार और राजभाषा विभाग से पूछा है कि अधिकरण का सारा कामकाज हिन्दी में करने के माननीय राष्ट्रपति जी के आदेशों के बावजूद भी सर्वोच्च न्यायालय से आये न्यायधीश हिन्दी के साथ कब तलक अन्याय करते रहेंगे ???
इस बारे में माननीय राष्ट्रपति जी, गृहमंत्री जी और राजभाषा विभाग के सचिव को ज्ञापन देकर शिकायत भी दर्ज करायी गयी।

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