Monday, December 19, 2016

बांग्लादेश में हमलों से बेहाल हिंदुओं ने भारत से मांगी मदद, जान-माल का खतरा जताया!!




बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं पर पिछले एक महीने से हमले किए जा रहे हैं । ये सिलसिला 30 अक्टूबर को नसीरपुर में एक हिंदू मंदिर पर हमले से शुरू हुआ था । उसके बाद कई घरों को जलाए जाने से हिंदू असुरक्षित महसूस किए जा रहे हैं । अब उन्होंने अपनी जानमाल की सुरक्षा के लिए भारत सरकार से दखल देने की गुहार लगाई है ।
बांग्लादेश में हमलों से बेहाल हिंदुओं ने भारत से मांगी मदद, जान-माल का खतरा जताया!!

इंडिया टूडे ने नसीरपुर में ग्राउंड जीरो पर जाकर स्थिति का जायजा लिया । भारत के त्रिपुरा से सटे बांग्लादेश के नसीरपुर में इस साल 30 अक्टूबर को नसीरनगर में एक हिंदू मंदिर पर हमला किया गया । साथ ही आस-पड़ोस में रहने वाले हिंदू परिवारों के घरों को भी निशाना बनाया गया । ये हमला फेसबुक पर एक हिंदू की कथित पोस्ट को आपत्तिजनक मानते हुए किया गया । बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमले और उनके घरों को जलाने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं । लेकिन हिंदू धर्मस्थल को नुकसान पहुंचाने की घटना हैरान करने वाली थी ।

हिंदुओं के सभी घरों पर हुए हमले!!

उस हमले के दौरान जिस पहले घर पर हमला किया गया था वो मिसेज दत्ता का था । मिसेज दत्ता की ओर से उस घटना का जिक्र करते हुए खौफ साफ उनके चेहरे पर देखा जा सकता है । मिसेज दत्ता ने बताया, 'एक स्थानीय मछुआरे  रसराज दास को फेसबुक पर पोस्ट डालने की वजह से उसी रात को उठा लिया गया था । अगले दिन ऐलान किया गया कि हिंदू घरों पर हमले किए जाएंगे । मेरे घर पर भी हमला किया गया और हिंदुओं के सभी घरों पर हमले किए गए । इस घटना के बाद भी अगले 2-3 दिनों तक स्थिति विस्फोटक बनी रही और हिंदुओं के घर जलाए जाते रहे । मछुआरों के मछली पकड़ने के जाल भी जला दिए गए ।'

पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया!!

मंदिर के पुजारी गोपाल दास ब्रह्मचारी के मुताबिक, स्थानीय पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराने के बाद भी अधिकारियों की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया । ब्रह्मचारी ने कहा, 'मैने 2 नवंबर को केस दर्ज कराया, लेकिन इसे रजिस्टर 9 नवंबर को किया गया । 18 नवंबर तक कोई गिरफ्तारी या कार्रवाई नहीं की गई । उत्पाती मुझे केस वापस नहीं लेने पर जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं । मैं असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ और मुझे कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है ।'

हिन्दुओं पर अत्याचार की कड़ी आलोचना!!

ऐसे हालात पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े तारिक रहमान ने कहा, 'हिंदू मंदिर का विध्वंस और महिलाओं पर अत्याचार की कड़ी से कड़ी आलोचना की जानी चाहिए । फेसबुक पर जिसने पोस्ट डाली उसके लिए एक आदमी ही जिम्मेदार था । लेकिन 800 से ज्यादा परिवारों पर हमला किया जाना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता । 

प्रधानमंत्री मोदी को हिंदुओं की सहायता करनी चाहिए!!

बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो (BBS) के मुताबिक, बांग्लादेश में 1.70 करोड़ हिंदू हैं । बांग्लादेश में 1951 में आबादी में हिंदुओं का अनुपात 22 फीसदी था जो 2011 में घटकर 8.4 फीसदी ही रह गया है । नसीरपुर के हिंदू समुदाय का कहना है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों के पक्षधर हैं । उन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं की तकलीफों पर गौर करते हुए जरूरी कदम उठाने चाहिए ।


भारत में भी हिन्दुओं पर अत्याचार!!

एक तरफ बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है दिन-प्रतिदिन हिन्दू कम हो रहे है दूसरी ओर भारत में भी यही हो रहा है शनिवार रात को उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार ने जुमे यानी शुक्रवार के दिन सरकारी दफ़्तरों में काम करने वाले मुसलमानों को नमाज पढ़ने के लिए डेढ़ घंटे की खास छुट्टी देने की घोषणा की है ।

लेकिन भारत में हिंदुओं को मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करने के लिए छुट्टी क्यों नही दी जाती है?

कहीं भारत में भी अल्पसंख्यक के नाम पर इस्लामीकरण को बढ़ावा देकर हिन्दुओं के मनोबल को कम करने का कोई षड़यंत्र तो नहीं है ???

एक तो पाकिस्तान में और बांग्लादेश में दिन-रात हिन्दुओं के घर जलाये जा रहे हैं हिन्दू महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही है, मंदिरों को तोड़ा जा रहा है, मंदिर के पुजारियों की हत्या की जा रही है, हिन्दुओं को मारा-पीटा जा रहा है दिन-रात हिन्दुओं को पलायन होना पड़ रहा है उसपर किसी नेता, मीडिया, संयुक्त राष्ट्र और सेक्युलर लोगो की नजर क्यों नही जाती है?

हिन्दू सहनशील है उसका तो फायदा नही उठाया जा रहा है..???

भारत में पहले मुस्लिम अत्याचार के कारण कश्मीर से हिन्दुओं को पलायन होना पड़ा, बाद में उत्तर प्रदेश के कैराना, अलीगढ़ आदि से पलायन होना पड़ा अब बंगाल में भी यही हो रहा है धुलागढ़ में हिन्दुओं के 60 घरों को जला दिया, बम फैंके गये, मंदिर तोड़ दिए गए, दुकान तोड़ दी गई लेकिन न ही प्रशासन ने कार्यवाही की और न ही मीडिया ने दिखाया और न ही किसी नेता या सेक्युलर लोगों ने हिन्दुओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई ।

जो हिन्दू कार्यकर्ता हिन्दू संत इन अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते हैं उनको जेल भेज दिया जाता है या हत्या कर दी जाती है ।

इन सबको देखकर भी हिन्दू कबतक चुपचाप बैठा रहेगा..???

जागो हिन्दू!!

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