Sunday, November 19, 2017

तसलीमा नसरीन : बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की रक्षा करे


November 19, 2017

बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन जो अभी भारत मे रही रही है। 1970 के दशक में एक कवि के रूप में उभरीं तसलीमा 1990 के दशक के आरम्भ में अत्यन्त प्रसिद्ध हो गयीं। वे अपने नारीवादीविचारों से युक्त लेखों तथा उपन्यासों एवं इस्लाम एवं अन्य नारीद्वेषी मजहबों की आलोचना के लिये जानी जाती हैं

अभी हाल ही बांग्लादेश में हिन्दुओ पर भयंकर अत्याचार हुआ उसके ऊपर उन्होंने बांग्लादेश के लिए एक लिखा है ।
Taslima Nasreen: Protecting Bangladesh's Minority Hindus

तसलीमा नसरीन ने लिखा है कि कुछ दिन पूर्व मैंने फेसबुक पर एक छायाचित्र देखा, जिसने मुझे दुखी करने के साथ-साथ हैरान भी कर दिया । उस फोटो में एक बूढ़ी महिला जार-जार रो रही थी, जिसका घर जला दिया गया था । उस रोती हुई वृद्ध महिला और आग में जलते उसके घर का फोटो देखकर पहले-पहल मुझे लगा कि, यह किसी रोहिंग्या का घर फूंकनेे का दृश्य है और असहाय रोहिंग्या वृद्धा अपनी संपत्ति नष्ट हो जाने की वजह से रो रही है । परंतु जब फोटो के नीचे लिखे शब्दों पर निगाह गई तो वहां लिखा था, यह बांग्लादेश के रंगपुर की घटना है । लगभग दस हजार मुसलमानों ने हिन्दुओं पर हमला किया और लूटपाट करने के बाद उनके घरों में आग लगा दी । बताया गया कि, टीटू राय नामक एक व्यक्ति ने फेसबुक पर इस्लाम का अपमान किया था । परंतु क्या दस हजार मुसलमानों को एकत्र करना इतना आसान काम है ? दुर्भाग्य से, आजकल यह करना बहुत सरल है । केवल अफवाह फैलाने की आवश्यकता होती है कि, अमुक मुहल्ले या इलाके के हिन्दू ने फेसबुक पर इस्लाम को लेकर गलत बातें लिखी हैं । बस फिर क्या है, उन्मादी मुसलमान हाथों में धारदार हथियार, लाठी, रॉड लेकर हिन्दुओं पर टूट पड़ते हैं और उनके घर फूंक देते हैं । कोई यह जानना नहीं चाहता कि, आखिर इस्लाम का अपमान कैसे किया गया और जिस पर अपमान करने का आरोप लगा है, उसकी फेसबुक आईडी असली है या नकली ? बांग्लादेश के हिन्दू जान-बूझकर यह जोखिम उठाने का साहस नहीं करेंगे । कहीं किसी मुसलमान ने ही तो हिन्दू के नाम से फर्जी आईडी बनाकर इस्लाम का अपमान तो नहीं किया ?

रंगपुर के ठाकुरबाड़ी गांव में जिस तरह यह हमला किया गया, उससे पता चलता है कि, मुसलमानों की भीड़ ने पहले से ही हमले की योजना बना रखी थी । ऐसा ही कुछ समय पहले नासिर नगर में भी हुआ था । वहां रसराज नामक एक हिन्दू लड़के की कथित फेसबुक पोस्ट को लेकर अनेक हिन्दुओं के घरों को जला दिया गया था । बाद में यह सच्चाई सामने आई कि, रसराज फेसबुक के बारे में कुछ जानता ही नहीं था । उसके नाम से फर्जी फेसबुक आईडी दरअसल किसी मुसलमान ने ही तैयार की थी । इतना ही नहीं, हिन्दुओं के घर कैसे लूटें-जलाएं और उन्हें आतंकित कर किस तरह बांग्लादेश से भगाया जाए, इसके लिए एक गिरोह बनाया गया था ।

ठीक इसी तरह रंगपुर में भी किया गया । टीटू राय नामक कोई व्यक्ति उक्त गांव में पिछले सात वर्षों से रहता ही नहीं । जो टीटू राय सात वर्ष पहले गांव में रहता था, वह कर्ज के बोझ से परेशान होकर गांव छोड़कर दूर किसी शहर में कपड़े का धंधा कर किसी तरह अपना जीवन काट रहा है । कथित फेसबुक एकाउंट पर टीटू राय ने अपना कोई स्टेटस भी नहीं दिया था । उसमें खुलना के मौलाना असदुल्लाह हमीदी का स्टेटस था । असल में मौलाना हमीदी का उद्देश्य सिलेट के एक हिन्दू युवक राकेश मंडल को फंसाना था । मौलाना हमीदी के स्टेटस को एमडी टीटू नामक एक शख्स ने शेयर किया था । उस एमडी टीटू को ही रंगपुर के पगलापी इलाके का टीटू राय समझकर उसके और साथ ही पडोसियों के घरों को फूंक दिया गया । नासिर नगर के रसराज के नाम पर भी इसी तरह से एक मुसलमान ने फर्जी फेसबुक आईडी तैयार की थी और फिर हिन्दुओं के घरों में लूटपाट के बाद आग के हवाले कर दिया गया था ।

बांग्लादेश के मुसलमानों का एक वर्ग दिन-प्रतिदिन प्रबल हिन्दू विरोधी होता जा रहा है । दरअसल वे गैर-मुस्लिमों को भगाकर बांग्लादेश को मुस्लिम मुल्क बनाने की कोशिश में हैं । उनमें से कई तो यह मानते हैं कि, गैर-मुसलमानों पर अत्याचार करने से शबाब मिलता है । आतंकवादियों का भी यही मानना है कि, काफिरों को धारदार हथियार से काटकर हत्या करने पर शबाब और साथ ही जन्न्त भी मिल जाती है । बांग्लादेश में इसी वर्ष मार्च में हिन्दुओं को फंसाने के लिए दाऊदकांदी के कुछ मुसलमान इतने उन्मादी हो गए थे कि, उन्होंने एक मदरसे में जाकर कुरान पर गंदगी छींट दी थी । अच्छा यह हुआ कि, हिन्दुओं के घरों को आग लगाने से पहले ही यह खुलासा हो गया कि, यह हरकत हबीबुर्रहमान और उसके साथियों ने की थी । मुझे नहीं पता कि, हबीबुर्रहमान या अन्य को किसी तरह की सजा मिली या नहीं ? मैं हैरान हूं कि, ऐसे गुंडों के खिलाफ धार्मिक मुसलमानों ने गुस्से का कोई इजहार क्यों नहीं किया ?

जैसे बांग्लादेश में हिन्दू विरोधी मुसलमानों की तादाद बढ़ रही है, वैसे ही भारत में मुस्लिम विरोधी हिन्दुओं की संख्या बढ़ रही है । वे भी मानते हैं कि मुसलमानों को भारत में रहने का अधिकार नहीं है । ऐसे मुस्लिम विरोधी हिन्दू यह भी मानते हैं कि 1947 में जो तमाम मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गए, वे अपनी जनसंख्या बढ़ा रहे हैं, आतंकी संगठनों में जुड़ रहे हैं और अल्पसंख्यक होने की वजह से सरकारी सुविधा भी पा रहे हैं । किसी मुसलमान ने गोमांस का सेवन किया है, उसे सरेआम पीट दिया जाता है । 

इसके बावजूद यह कहना होगा कि भारत और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के बीच काफी अंतर है । बांग्लादेश में हिन्दुओं की संख्या में कमी आई है । जबकि भारत में अल्पसंख्यकों की तादाद बढ़ी है । भारत में मुसलमानों की संख्या पूरे बांग्लादेश की जनसंख्या से अधिक है । भारत में कट्टर हिन्दुओं द्वारा मुसलमान पर अत्याचार होता है तो देश उनके साथ होता है । भारतीय कानून हिन्दू हो या फिर मुसलमान, सभी को समान आंखों से देखता है, परंतु बांग्लादेश में जब कट्टर मुसलमानों द्वारा हिन्दुओं पर अत्याचार होता है तो सरकारी मदद और सरकारी सहानुभूति, कुछ भी नहीं मिलती । वहां हिन्दुओं की संख्या इतनी कम हो चुकी है कि उन्हें वोटबैंक के रूप में नहीं देखा जाता । इस्लामपरस्त पार्टियों के लोग वोट डालने गए हिन्दुओं को डरा-धमकाकर रखते हैं । बांग्लादेश में हिन्दू केवल दूसरे दर्जे के नागरिक ही नहीं, बल्कि विलुप्त होती बंगाली जाति हैं । कभी-कभी मैं सोचती हूं कि क्या बांग्लादेश सऊदी अरब जैसा हो जाएगा ? एक ओर बांग्लादेश के मुसलमान म्यांमार सेना के हाथों सताए गए असहाय रोहिंग्या की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं और दूसरी ओर वे अपने ही देश में हिन्दुओं के साथ म्यांमार सेना की तरह का बर्ताव करते हैैं । ऐसे में आखिर म्यामांर की बर्बर सेना और बांग्लादेश के मुसलमानों में फर्क क्या रहा ? मुझे तो कोई फर्क नहीं दिख रहा । जो भी कट्टरवादी बौद्ध, ईसाई, मुसलमान हैं, वे सब एक जैसे हैं । वे समाज को पीछे धकेलना चाहते हैं । हिंसा और नफरत ही ऐसे लोगों का सहारा है । कट्टरवाद के खिलाफ सभी को मिलकर खड़ा होना होगा, नहीं तो इतने वर्षों में तैयार किए हुए आजाद ख्याल गणतंत्र हिंसा और नफरत से हार जाएंंगे । जिस किसी देश से जितनी बार बहुसंख्यकों के अत्याचार से डरकर अल्पसंख्यक भागते हैं, उतनी बार उस देश का नुकसान होता है । हम बांग्लादेश को और कितनी बार नष्ट करेंगे ? स्त्रोत : नर्इ दूनिया

भारत में किसी भी गोतस्कर, मुसलमान या ईसाई पर थोड़ा सा भी उनको कुछ बोलते है तो या उनपर कार्यवाही करते है तो मीडिया एवं बुद्धिजीवी सेकुलर छाती पीटने लगते है की भारत में हिंसा बढ़ गई है लेकिन बांग्लादेश में सैंकड़ो घर जला दिया फिर भी उस पर ये सब चुप क्यों है?

जिहादी आप पर अत्याचार करे उससे पहले हिन्दू एक हो जावो नही तभी बचोगे नही तो आगे जाकर बहुत पछताना पड़ेगा।

Saturday, November 18, 2017

बिरसा मुंडा की 142 वीं जयंती मनाई, जानिए कौन थे महान क्रांतिकारी बिरसा मुंडा


November 18, 2017       www.azaadbharat.org

हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में सही इतिहास को स्थान ही नही दिया गया है, हमारे भारत मे ऐसे महान क्रांतिकारी वीर हुए की आपको भी अपने पूर्वज पर गर्व होने लगेगा ।

महान क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की 142 वीं जयंती बुधवार को आदिवासी संगठन ने धूम-धाम से मनाई ।

बिरसा मुंडा के परिचय 
सुगना मुंडा और करमी हातूके पुत्र बिरसा मुंडाका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड प्रदेशमें रांचीके उलीहातू गांवमें हुआ था । ‘बिरसा भगवान’के नामसे लोकप्रिय थे । बिरसाका जन्म बृहस्पतिवारको हुआ था, इसलिए मुंडा जनजातियोंकी परंपराके अनुसार उनका नाम ‘बिरसा मुंडा’ रखा गया । इनके पिता एक खेतिहर मजदूर थे । वे बांससे बनी एक छोटी सी झोंपडीमें अपने परिवारके साथ रहते थे ।
बिरसा बचपनसे ही बडे प्रतिभाशाली थे । बिरसाका परिवार अत्यंत गरीबीमें जीवन- यापन कर रहा था । गरीबीके कारण ही बिरसाको उनके मामाके पास भेज दिया गया जहां वे एक विद्यालयमें जाने लगे । विद्यालयके संचालक बिरसाकी प्रतिभासे बहुत प्रभावित हुए । उन्होंने बिरसाको जर्मन मिशन पाठशालामें पढनेकी सलाह दी । वहां पढनेके लिए ईसाई धर्म स्वीकार करना अनिवार्य था । अतः बिरसा और उनके सभी परिवार वालों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया ।

 हिंदुत्वकी प्रेरणा

सन् 1886 से 1890 तक का समय बिरसाने जर्मन मिशनमें बिताया । इसके बाद उन्होंने जर्मन मिशनरीकी सदस्यता त्याग दी और प्रसिद्ध वैष्णव भक्त आनंद पांडेके संपर्क में आये । 1894 में मानसूनके छोटानागपुरमें असफल होनेके कारण भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी । बिरसाने पूरे मनोयोगसे अपने लोगोंकी सेवा की । बिरसाने आनंद पांडेजीसे धार्मिक शिक्षा ग्रहण की । आनंद पांडेजीके सत्संगसे उनकी रुचि भारतीय दर्शन और संस्कृतिके रहस्योंको जाननेकी ओर हो गयी । धार्मिक शिक्षा ग्रहण करनेके साथ-साथ उन्होंने रामायण, महाभारत, हितोपदेश, गीता आदि धर्मग्रंथोंका भी अध्ययन किया । इसके बाद वे सत्यकी खोजके लिए एकांत स्थानपर कठोर साधना करने लगे । लगभग चार वर्ष के एकांतवासके बाद जब बिरसा प्रकट हुए तो वे एक हिंदु महात्माकी तरह पीला वस्त्र, लकडीकी खडाऊं और यज्ञोपवीत धारण करने लगे थे ।

धर्मांतरका विरोध

बिरसाने हिंदु धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार करना शुरू कर दिया । ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले वनवासी बंधुओं को उन्होंने समझाया कि ‘ईसाई धर्म हमारा अपना धर्म नहीं है । यह अंग्रेजोंका धर्म है वे हमारे देशपर शासन करते हैं, इसलिए वे हमारे हिंदु धर्मका विरोध और ईसाई धर्मका प्रचार कर रहे हैं । ईसाई धर्म अपनाने से हम अपने पूर्वजोंकी श्रेष्ठ परंपरासे विमुख होते जा रहे हैं । अब हमें जागना चाहिए । उनके विचारोंसे प्रभावित होकर बहुतसे वनवासी उनके पास आने लगे और उनके शिष्य बन गए ।
वन अधिकारी वनवासियों के साथ ऐसा व्यवहार करते थे जैसे उनके सभी अधिकार समाप्त कर दिए गए हों । वनवासियोंने इसका विरोध किया और अदालत में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने अपने पुराने पैतृक अधिकारों को बहाल करने की मांग की । इस याचिका पर सरकारने कोई ध्यान नहीं दिया । बिरसा मुंडाने वनवासी किसानोंको साथ लेकर स्थानियों अधिकारियोंके अत्याचारोंके विरुद्ध याचिका दायर की । इस याचिका का भी कोई परिणाम नहीं निकला ।

वनवासियों का संगठन

बिरसाके विचारोंका वनवासी बंधुओं पर गहरा प्रभाव पडा । धीरे-धीरे बडी संख्यामें लोग उनके अनुयायी बनते गए । बिरसा उन्हें प्रवचन सुनाते और अपने अधिकारों के लिए लडने की प्रेरणा देते । इस प्रकार उन्होंने वनवासियों का संगठन बना लिया । बिरसाके बढते प्रभाव और लोकप्रियताको देखकर अंग्रेज मिशनरी चिंतित हो उठे । उन्हें डर था कि बिरसा द्वारा बनाया गया वनवासियोंका यह संगठन आगे चलकर मिशनरियों और अंग्रेजी शासन के लिए संकट बन सकता है। अतः बिरसाको गिरफ्तार कर लिया गया ।

अंग्रेजी शासन को उखाड फेंकनेका संकल्प

बिरसाकी चमत्कारी शक्ति और उनकी सेवाभावना के कारण वनवासी उन्हें भगवानका अवतार मानने लगे थे। अतः उनकी गिरफ्तारीसे सारे वनांचल में असंतोष फैल गया । वनवासियोंने हजारों की संख्यामें एकत्रित होकर पुलिस थानेका घेराव किया और उनको निर्दोष बताते हुए उन्हें छोडनेकी मांग की । अंग्रेजी सरकारने वनवासी मुंडाओंपर भी राजद्रोहका आरोप लगाकर उनपर मुकदमा चला दिया । बिरसाको दो वर्षके सश्रम कारावासकी सजा सुनाई गयी और फिर हजारीबाग की जेलमें भेज दिया गया । बिरसाका अपराध यह था कि उन्होंने वनवासियोंको अपने अधिकारोंके लिए लडने हेतु संगठित किया था । जेल जानेके बाद बिरसाके मनमें अंग्रेजोंके प्रति घृणा और बढ गयी और उन्होंने अंग्रेजी शासन को उखाड फेंकनेका संकल्प लिया ।

दो वर्षकी सजा पूरी करनेके बाद बिरसाको जेलसे मुक्त कर दिया गया । उनकी मुक्तिका समाचार पाकर हजारोंकी संख्यामें वनवासी उनके पास आये । बिरसाने उनके साथ गुप्त सभाएं कीं और अंग्रेजी शासनके विरुद्ध संघर्षके लिए उन्हें संगठित किया । अपने साथियों को उन्होंने शस्त्र संग्रह करने, तीर कमान बनाने और कुल्हाडीकी धार तेज करने जैसे कार्यों में लगाकर उन्हें सशस्त्र क्रान्तिकी तैयारी करनेका निर्देश दिया । सन 1899 में इस क्रांति का श्रीगणेश किया गया । बिरसाके नेतृत्वमें क्रांतिकारियोंने रांचीसे लेकर चाईबासा तक की पुलिस चौकियोंको घेर लिया और ईसाई मिशनरियों तथा अंग्रेज अधिकारियोंपर तीरोंकी बौछार शुरू कर दी । रांचीमें कई दिनों तक कर्फ्यू जैसी स्थिति बनी रही । घबराकर अंग्रेजों ने हजारीबाग और कलकत्तासे सेना बुलवा ली ।

 राष्ट्र हेतु सर्वस्व अर्पण

अब बिरसाके नेतृत्वमें वनवासियोंने अंग्रेज सेनासे सीधी लडाई छेड दी । अंग्रेजोंके पास बंदूक, बम आदि आधुनिक हथियार थे, जबकि वनवासी क्रांतिकारियोंके पास उनके साधारण हथियार तीर-कमान आदि ही थे । बिरसा और उनके अनुनायियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेज सेनाका मुकाबला किया। अंतमें बिरसाके लगभग चार सौ अनुयायी मारे गए । इस घटनाके कुछ दिन बाद अंग्रेजोंने मौका पाकर बिरसाको जंगलसे गिरफ्तार कर लिया । उन्हें जंजीरोंमें जकडकर रांची जेलमें भेज दिया गया, जहां उन्हें कठोर यातनाएं दी गयीं । बिरसा हंसते-हंसते सब कुछ सहते रहे और अंत में 9 जून 1900 को कारावासमें उनका देहावसान हो गया । बिरसाने भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलनको नयी दिशा देकर भारतीयों, विशेषकर वनवासियोंमें स्वदेश प्रेम की भावना जाग्रत की ।

बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तोंमें की जाती है । उन्होंने वनवासियोंको संगठित कर उन्हें अंग्रेजी शासनके विरुद्ध संघर्ष करनेके लिए तैयार किया । इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय संस्कृतिकी रक्षा करनेके लिए धर्मांतरण करने वाले ईसाई मिशनरियोंका विरोध किया । ईसाई धर्म स्वीकार करनेवाले हिन्दुओंको उन्होंने अपनी सभ्यता एवं संस्कृतिकी जानकारी दी और अंग्रेजोंके षडयन्त्रके प्रति सचेत किया । आज भी झारखण्ड, उडीसा, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेशके वनवासी लोग बिरसाको भगवानके रूपमें पूजते हैं । अपने पच्चीस वर्षके अल्प जीवनकालमें ही उन्होंने वनवासियोंमें स्वदेशी तथा भारतीय संस्कृतिके प्रति जो प्रेरणा जगाई वह अतुलनीय है । धर्मांतरण, शोषण और अन्यायके विरुद्ध सशस्त्र क्रांतिका संचालन  करने वाले महान सेनानायक थे ‘बिरसा मुंडा’ ।

आज भी भारत में वेटिकन सिटी के इशारे पर भारत मे ईसाई मिशनरियों द्वारा पुरजोश से धर्मान्तरण किया जा रहा है, लेकिन जनता को बिरसा मुंडा के पथ पर चलना चाहिए । जो हिन्दू संस्कृति को तोड़ने के लिए ईसाई मिशनरियों ने भारत मे धर्मान्तरण रूपी जाल बिसाया है इसमे भोले-भाले हिन्दू फस जाते है और कोई हिन्दूनिष्ठ विरोध करता है तो उनकी हत्या करवा दी जाती है या मीडिया द्वारा बदनाम करवाकर झूठे केस बनाकर जेल में भिजवाया जाता है ।

हिन्दुस्तानी इन षडयंत्र को समजो और बिरसा मुंडा के पथ पर चलो ।

Friday, November 17, 2017

छोटी बच्ची से पादरी दो साल तक करता रहा यौन शोषण, हुआ गिरफ्तार, मीडिया मौन !!


November 17, 2017


मात्र एक वर्ग विशेष पर नजर गड़ाये बैठा खास मीडिया वर्ग ना जाने इन खबरों को क्यों नहीं दिखा रहा है, क्यों भगवा वस्त्र देख अपने सारे कैमरे अचानक ही सब महत्वपूर्ण खबरों पर से हटाकर उधर घूमा देता है ??

ईसाई समुदाय के चर्च जैसे पवित्र धर्मस्थल में दुष्कर्म करने वाले ईसाई पादरी को मीडिया तथा सेक्युलरिस्ट क्या कहेंगे ?
The pastor has been sexually exploited for two years, arrested, media mum

उल्लासनगर : प्रार्थना घर (चर्च) में प्रेयर करवाने की आड़ में एक पादरी अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर पहले नजदीकियां बनाई । फिर अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर दो वर्षों तक ब्लू फिल्म दिखाकर छात्रा को महिला समलैंगिक और  हवस का शिकार बनाता रहा । छात्रा की शिकायत पर विट्ठलवाड़ी पुलिस ने पादरी और उसकी प्रेमिका के खिलाफ बलात्कार, पोक्सो के तहत मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया ।

चर्च आई नाबालिक को देखकर बिगड़ी नियत 
कैम्प पांच में रहने वाली महिला, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत है । वो अपनी 10वी पढ़ने वाली बेटी के साथ कैम्प-4 स्थित चर्च में प्रेयर करने आती थी । वहाँ उसकी मुलाकात चर्च के पादरी गीत कुमार उर्फ श्रीजीत पिल्ले (41) से हुई । पादरी की नजर बच्ची को देखकर खराब गई और उसने अपनी प्रेमिका के जरिये बच्ची को अपनी जाल में फ़साने का षड्यंत्र रचा । पादरी पिल्ले की प्रेमिका ने छात्रा को दो साल पहले अपने जाल में फंसाकर चर्च में प्रेयर करने के बाद उसे पादरी के घर ले गई । फिर वहाँ से पादरी के इशारे पर उसकी प्रेमिका ने छात्रा को उत्तेजित करने का काम शुरू कर दिया । (स्तोत्र : दबंग दुनिया)

इतनी बड़ी खरब होते हुए भी मीडिया खबर को छुपा रही है अगर #मीडिया इतनी #निष्पक्ष #होती तो #ईसाई पादरी के लिए भी #खबरें #दिखाती और डिबेट बैठाकर उनके खिलाफ भी बहस करती लेकिन ऐसा नही कर रही है इससे साफ पता चलता है कि मीडिया को बाकि खबरों से लेना-देना नही है।

#मीडिया का केवल यही #उद्देश्य है कि कैसे भी करके #भारतीय संस्कृति को #खत्म कर दिया जाये इसलिए #हिन्दुओं के #धर्मगुरुओं को #टारगेट किया जा रहा है जिससे उनके ऊपर जो करोड़ो लोगों की आस्था है वो टूट जाये और पश्चिमी संस्कृति को अपना ले ।

और बड़े मजे की बात है कि उस न्यूज को हिन्दू ही देखते हैं और बाद में उन्हीं का मजाक उड़ाते है कि देखो कैसे भक्तों को मूर्ख बनाकर पैसे लूट रहे हैं और लड़कियों के बलात्कार करते हैं, लेकिन वही भोला भाला हिन्दू दूसरी ओर कभी नही सोचता कि आखिर #हमारी देश की कई बड़ी बड़ी समस्याएं है, #गरीबी #मंहगाई, #बेरोजगारी, किसानों की #आत्महत्या, #राम मंदिर, 370, #गौ हत्या आदि आदि पर #मीडिया #नही #दिखाती है और न ही ईसाई पादरी और मौलवियों के खिलाफ दिखाती है । क्यों इतना प्राइम टाइम देकर हिन्दू धर्मगुरुओं पर ही बहस करती है तो आखिर इतने पैसे आते कहाँ से हैं..??

इस बारे में सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने बताया है कि #मीडिया का अधिकतर #फंड #वेटिकन सिटी और मुस्लिम देशों से आता है । जिनका #उद्देश्य है कि कैसे भी करके #हिन्दू संस्कृति को #खत्म करें । जिससे वो आसानी से #धर्मान्तरण करा सके ।

अब आपके मन में प्रश्न होता होगा कि उनको इससे क्या फायदा होगा?

आपको बता दें कि भारतीय #मीडिया को हिन्दू संतों को बदनाम करने के लिए और #पादरियों के #दुष्कर्म छुपाने के लिए पैसा मिलता है । 

अगर हिन्दू साधु-संतों के प्रति देशवासियों की आस्था बनी रही तो भारत में धर्मांतरण का कार्य आसानी से नहीं होगा।

अब सवाल है कि धर्मांतरण करवाने से उनको क्या फायदा मिलेगा..??

भारतीय #संस्कृति वो उत्तम और पवित्र संस्कृति है जो हमें कम सुविधाओं में भी सुखी स्वस्थ और सम्मानित जीवन जीने की शैली देती है । पश्चिम संस्कृति में भोग की प्रधानता है जबकि भारतीय संस्कृति में योग की प्रधानता है । ये वो #संस्कृति है जो मानव को #महेश्वर तक की यात्रा कराने में सक्षम है और दूसरी ओर पाश्चात्य संस्कृति बाहरी चकाचौंध वाले जीवन को ही सर्वस्व समझती है। 

अब अगर भारत पर राज्य करना है तो सबसे पहले भारतवासियों का नैतिक व चारित्रिक पतन कराना होगा व इनके आस्था के केंद्र साधु-संतों को तोड़ना होगा ।

यही काम #मीडिया द्वारा #मिशनरियाँ करा रही हैं हिन्दू #साधु संतों के प्रति समाज के मन में #नफरत पैदा करके ।

दूसरा पहलू ये भी है कि #राजनेता भी #नहीं चाहते हैं कि किसी भी धर्मगुरू के इतने फॉलोवर्स हो जिससे उनको हर चुनाव में उनके सामने नाक रगड़ना पड़े इसलिए वो भी इसमे शामिल है क्योंकि #राजनेता केवल #वोट बैंक को ही देखते हैं उनको #हिन्दू धर्म या संस्कृति से कोई लेना देना नही है।

अतः हिन्दुस्तानी सावधान रहें, बिकाऊ मीडिया और सेकुलर लोगो से,नहीं तो फिर से हिंदुस्तान गुलामी की जंजीरों में जकड़ा जाएगा ।

आज हर #हिन्दुस्तानी का #कर्त्तव्य है कि वो #मीडिया की बातों में #न आकर स्वयं #सच्चाई तक #पहुँचने का #प्रयास करे ।

Thursday, November 16, 2017

चारों तरफ से एक ही आवाज पद्मावती फिल्म षडयंत्र के तहत बनाई गई है, बेन लगना ही चाहिए

November 16, 2017

फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर शुरू हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, बल्कि मुसीबतें और बढ़ती ही जा रही हैं। चारों तरफ पुरजोर विरोध हो रहा है।

सभी हिन्दुत्वनिष्ठों ने पद्मावती फिल्म पर आपत्ति जताई है । सेंसर बोर्ड सदस्य के सदस्य अर्जुन गुप्ता ने तो गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर संजय लीला भंसाली पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने की अपील की है। अर्जुन गुप्ता ने आरोप लगाया है कि भंसाली ने इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है जिससे राष्ट्रीय भावनाएं आहत हुई हैं। 
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने फिल्म 'पद्मावती' को लेकर कहा कि 'पद्मावती' को बनाने के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है और इसकी फंडिंग दुबई से की गई है। इस मामले में उन्होंने बाकायदा भंसाली की जांच की भी मांग की थी। 

दीपिका पादुकोण बड़ा खुलासा डॉ स्वामी ने किया, स्वामी ने कहा कि दीपिका पादुकण भारतीय नहीं है, वो एक डच नागरिक है, पर पैसा कमाने के मकसद से मुंबई में रहती है, हिंदी फिल्मों के जरिये भारतीयों से पैसा कमाने के लिए यहाँ रहती है।

यूनियन मिनिस्टर गिरिराज सिंह ने कहा कि क्या संजय लीला भंसाली या किसी और में भी इतनी हिम्मत है कि वे दूसरे धर्मों पर फिल्म बनाएं या उन पर कोई टिप्पणी करें???
 ये लोग सिर्फ हिंदू गुरु, भगवान और योद्धाओं पर फिल्में बनाते हैं। जिसे हम और बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उमा भारती ने एक खुला खत लिखकर कहा था कि ये कलाकार अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इतिहास के साथ खेल रहे हैं वो गलत है।

बीजीपी सांसद साक्षी महाराज कहते हैं, 'जिस तरह पद्मावती, महारानी, मां, हिंदू और किसानों का मजाक बनाया जा रहा है, सरकार और प्रशासन को पता होना चाहिए कि यह गलत हो रहा है और फिल्म पद्मावती को पूरी तरह बैन किया जाना चाहिए।'

इसके आगे वो कहते हैं, 'फिल्म इंडस्ट्री को अस्मिता और राष्ट्र से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें सिर्फ पैसा चाहिए। वह इसके लिए नंगे होने के साथ-साथ कुछ भी कर सकते हैं।' 

योगी सरकार ने सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव को एक पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है  'पद्मावती फिल्म की कथावस्तु एवं ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किये जाने को लेकर व्याप्त जनाक्रोश एवं इसके सार्वजनिक चित्रण से शान्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। विभिन्‍न संगठन फिल्म के प्रदर्शित होने पर सिनेमाघरों में तोड़फोड़, आगजनी की चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में मंत्रालय से अनुरोध है कि वह इस बारे में सेंसर बोर्ड को बताए, जिससे फिल्म के प्रमाणन पर निर्णय लेते समय बोर्ड के सदस्य जनभावनाओं को जानते हुए विधि अनुसार निर्णय ले सकें।'

राजस्थान के अजमेर स्थित सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादा नशीन दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फिल्म ‘पद्मावती’ के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग भी की। खान ने कहा कि फिल्म के विरोध में देश के मुसलमानों को राजपूतों का समर्थन करना चाहिए।

करनी सेना ने कहा कि अगर फिल्म रिलीज होती है तो वो दीपिका की नाक काट लेंगे और जो संजय भंसाली के सिर को काट कर लाएगा उसे 5 करोड़ का ईनाम दिया जाएगा।


एक कवि ने तो कविता भी लिख दी..

कवि ने लिखा कि रजपूती गाथा से कुंठित,जिसकी नीयत ही काली है,
बॉलीवुड का पाखंड लिए,संजय लीला भंसाली है,

ज्वाला मुखियों का अग्निताप,माचिस की तीली आंकेगी ?
सूरज के आंगन में, अब जुगनू की औलादें झाकेंगी ?

परदे पर होगी मनमानी, जो चाहेंगे ,दिखलायेंगे?
बेशर्म इरादे,मर्यादा के शयनकक्ष तक जाएंगे?

क्या सोच रहा था भंसाली?तू जो चाहेगा कह लेगा?
मेवाड़ धरा का स्वाभिमान,चुपचाप सभी कुछ सह लेगा?

अब नहीं,नहीं जी,और नही,यह साजिश पलने देना है,
जो बलिदानों को गाली दे,वो फिल्म न बनने देना है,

संजय तूने शायद अफीम पीली झूठे इतिहासों की,
अभिव्यक्ति तुम्हारी है गुलाम शायद वहशी अहसासों की,

रानी पद्मावत नाम नही,भारत की शौर्य कहानी है,
रानी पद्मावत रजपूती गाथा की अमर निशानी है,

रानी पद्मावत नाम नही,चित्तौड़ किले की काया है,
वो मर्यादा का दीपक थी,वो परम्परा की छाया है,

खल कामी खिलजी का चरित्र तुमको रूमानी लगता है,
वो क्रूर दरिंदा भी तुमको अब प्रेम निशानी लगता है,

जो खिलजी रानी रूप देख हमला करने को आया था,
रानी का रोम तलक भी जिसने कभी नही छू पाया था,

जिस खिलजी के प्रतिउत्तर में,रजपूत वीर कुर्बान हुए,
आंगन की तुलसी बची रहे,इस चाहत में बलिदान हुए,

खिलजी के गंदे हाथ छुएं,उससे पहले प्रतिकार किया,
रानी अभिमानी ने आखिर जलकर मरना स्वीकार किया,

रे मूरख संजय देख जरा,जो अग्नि चिता पर लेटी थी,
वो सुल्तानों की लूट नही,सच्चे हिन्दू की बेटी थी,

वो रानी पावनता प्रतीक,वो स्वाभिमानी की मानी थी,
वो रानी रजपूताने की,वो रानी हिंदुस्तानी थी,

उस रानी की गाथा,बाजारी राहों में दिखलाओगे?
तुम रानी के तन को खिलजी की बाँहों में दिखलाओगे?

हो फिल्मकार तो फिल्म बनाओ, बुरके के हालातों पर,
10 बच्चे पैदा करने पर, इस्लामी तीन तलाकों पर,

अभिव्यक्ति-दुहाई देते हो,पर अक्सर ही बेहोश रहे,
तुम इस्लामी आतंकों पर, बहरे होकर खामोश रहे,

रानी पद्मावत के बेटों के थप्पड़ जब दो पड़ते हैं,
तुमको हिन्दू के बेटों में आतंकी दिखने लगते हैं?

तुम सम्मुख धर्म सनातन के,कीचड बरसाते जाओगे?
भारत की बहन बेटियों को नीलाम कराते जाओगे?

ना रानी का जौहर देखा,ना बलिदानी अरमान दिखा?
रानी का जिस्म तुम्हे केवल अय्याशी का सामान दिखा?

बॉलीवुड के भांडों सुन लो,दुःस्वप्न नही पलने देंगे,
चलचित्र बनाओ खूब मगर,छलचित्र नही चलने देंगे,

सभी हिन्दुत्वनिष्ठों की बातों से सिद्ध होता है कि हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए पद्मावती, रईस आदि फिल्में बनाई जाती हैं जिसमें हिन्दुओं को नीचा और अन्य धर्मों का महिमा मंडन किया जाता है यह एक धीमा जहर है जो हिन्दुस्तानियों को अपनी संस्कृति से विमुख करने का भयंकर षड्यंत्र है, इसको रोकने के लिए सभी आगे आये और सरकार को प्रार्थना है कि सेंसर बोर्ड में जो ऐसी फिल्म रिलीज होने की सहमति दे रहे है उनको बाहर करें और भारतीय संस्कृति पर सही इतिहास वाली फिल्म ही पास की जाये और बॉलीवुड में भी हिन्दुविरोधियों का बहिष्कार करना चाहिए। जनता भी सभी फिल्मों का त्याग करें तभी साजिशकर्ताओं का होश ठिकाने आएगा ।

Wednesday, November 15, 2017

दिल्ली में प्रदूषण दूर करने के लिए सरकार और सभी को करना होगा यह काम शीघ्र

November 15, 2017    www.azaadbharat.org
🚩 दिल्ली में पिछली साल की तरह इस साल भी भयंकर प्रदूषण हुआ है, जिससे लोगों को श्वास लेना भी मुश्किल हो गया है ।
🚩एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में सालाना 10,000 से 30,000 जानें जा रही हैं. प्रदूषण हर दिन भारत की राजधानी में औसतन 80 लोगों की जान ले रहा है।
To remove pollution in Delhi, the government and everyone will have to do this work soon

🚩 विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ की एक नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 13 भारत के शहर हैं। इनमें राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है। एक ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली में प्रदूषण की समस्या की ओर ध्यान खींचा है। एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नॉलॉजी पत्रिका में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में अधिकतर मौतें दिल की बीमारी और स्ट्रोक के कारण होती हैं। दिल्ली की हवा में पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 की मात्रा प्रति घन मीटर 150 माइक्रोग्राम है। यह देश में निर्धारित सीमा का चार गुना और डब्ल्यूएचओ की तय सीमा का 15 गुना है। रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 पर काबू पा कर दिल्ली में प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों को 45 से 85 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
🚩 नई दिल्ली में पिछले 30 सालों में वाहनों की संख्या 1.8 लाख से बढ़ कर 35 लाख हो गई है। गाड़ियों के अलावा शहर में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट प्रदूषण का अहम कारण हैं। कुल वायु प्रदूषण में 80 फीसदी हाथ इन्हीं का है।
🚩 दुनिया भर में वायु प्रदूषण का ब्योरा लेती रिपोर्ट में चीन और भारत पर खास ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट में चेतावनी भरे स्वर में कहा गया है कि अगर ये दोनों देश प्रदूषण पर नियंत्रण कर पाएं, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है ।
🚩 प्रदूषण दूर करने के लिये सरकार भी कुछ उपाय कर रही है, लेकिन ये फैसले कुछ समय के लिए ही काम कर सकते है लेकिन हवामान को हमेशा के लिए शुद्ध रखना और स्वस्थ रहना, इसके लिए आपको एक सरल और अच्छा उपाय बता रहे हैं जो सरकार और हर व्यक्ति को शीघ्र करना होगा तभी #प्रदूषण मुक्त #दिल्ली होगा और हर व्यक्ति #स्वस्थ रह पाएगा ।
🚩#स्वास्थ्य एवं #पर्यावरण रक्षक प्रकृति के अनमोल उपहार !!
🚩#अन्न, जल और वायु हमारे जीवन के आधार हैं । सामान्य #मनुष्य प्रतिदिन औसतन 1 किलो अन्न और 2 किलो जल लेता है परंतु इनके साथ वह करीब 10,000 लीटर (12 से 13.5 किलो) #वायु भी लेता है । इसलिए #स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु शुद्ध वायु अत्यंत आवश्यक है ।
🚩#प्रदूषणयुक्त, ऋण-आयनों की कमी वाली एवं ओजोन रहित हवा से रोग प्रतिकारक शक्ति का ह्रास होता है व कई प्रकार की शारीरिक-मानसिक #बीमारियाँ होती हैं ।
🚩#प्रदूषण मुक्त कैसे हो?
🚩#पीपल का वृक्ष दमानाशक, हृदयपोषक, ऋण-आयनों का खजाना, रोगनाशक, आह्लाद व मानसिक  प्रसन्नता का खजाना  तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढानेवाला है । बुद्धू बालकों तथा हताश-निराश लोगों को भी #पीपल के स्पर्श एवं उसकी छाया में बैठने से अमिट #स्वास्थ्य-लाभ व पुण्य-लाभ होता है । #पीपल की जितनी महिमा गायें, कम है । #पर्यावरण की शुद्धि के लिए जनता-जनार्दन एवं #सरकार को बबूल, नीलगिरी (यूकेलिप्टस) आदि जीवनशक्ति का ह्रास करनेवाले वृक्ष सड़कों एवं अन्य स्थानों से #हटाने चाहिए और #पीपल, आँवला, तुलसी, वटवृक्ष व नीम के वृक्ष दिल खोल के #लगाने चाहिए ।
🚩इससे #अरबों रुपयों की दवाइयों का खर्च बच जायेगा । ये #वृक्ष शुद्ध वायु के द्वारा प्राणिमात्र को एक प्रकार का उत्तम भोजन प्रदान करते हैं ।
🚩#पूज्य #बापू जी कहते हैं कि ये #वृक्ष लगाने से आपके द्वारा प्राणिमात्र की बड़ी सेवा होगी । यह लेख पढने के बाद #सरकार में अमलदारों व अधिकारियों को सूचित करना भी एक सेवा होगी । खुद #वृक्ष लगाना और दूसरों को प्रेरित करना भी एक #सेवा होगी ।
🚩#पीपल : यह धुएँ तथा धूलि के दोषों को वातावरण से सोखकर #पर्यावरण की रक्षा करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण वृक्ष है । यह #चौबीसों घंटे #ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है । इसके नित्य स्पर्श से रोग-प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि, मनःशुद्धि, आलस्य में कमी, ग्रहपीड़ा का शमन, शरीर के आभामंडल की शुद्धि और विचारधारा में धनात्मक परिवर्तन होता है । बालकों के लिए #पीपल का स्पर्श बुद्धिवर्धक है । #रविवार को पीपल का स्पर्श न करें ।
🚩#आँवला : #आँवले का वृक्ष #भगवान #विष्णु को प्रिय है । इसके #स्मरणमात्र से #गोदान का फल प्राप्त होता है । इसके दर्शन से दुगना और फल खाने से तिगुना पुण्य होता है । #आँवले के वृक्ष का #पूजन कामनापूर्ति में सहायक है । #कार्तिक में आँवले के वन में भगवान श्रीहरि की पूजा तथा आँवले की छाया में भोजन पापनाशक है । #आँवले के वृक्षों से वातावरण में ऋणायनों की वृद्धि होती है तथा शरीर में शक्ति का, धनात्मक ऊर्जा का संचार होता है ।
🚩#आँवले से नित्य स्नान पुण्यमय माना जाता है और #लक्ष्मीप्राप्ति में सहायक है । जिस #घर में सदा #आँवला रखा रहता है वहाँ भूत, प्रेत और राक्षस नहीं जाते ।
🚩#तुलसी : #प्रदूषित #वायु के #शुद्धीकरण में #तुलसी का #योगदान सर्वाधिक है । #तुलसी का पौधा उच्छ्वास में स्फूर्तिप्रद ओजोन वायु छोडता है, जिसमें #ऑक्सीजन के दो के स्थान पर तीन परमाणु होते हैं । #ओजोन वायु वातावरण के बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि को नष्ट करके #ऑक्सीजन में रूपांतरित हो जाती है । #तुलसी उत्तम प्रदूषणनाशक है । #फ्रेंच डॉ. विक्टर रेसीन कहते हैं : ‘#तुलसी एक अद्भुत औषधि है । यह रक्तचाप व #पाचनक्रिया का नियमन तथा रक्त की वृद्धि करती है ।
🚩#वटवृक्ष : यह #वैज्ञानिक दृष्टि से #पृथ्वी में #जल की मात्रा का स्थिरीकरण करनेवाला एकमात्र #वृक्ष है । यह भूमिक्षरण को रोकता है । इस वृक्ष के समस्त भाग #औषधि का कार्य करते हैं । यह #स्मरणशक्ति व एकाग्रता की वृद्धि करता है । इसमें देवों का वास माना जाता है । इसकी छाया में #साधना करना बहुत लाभदायी है । #वातावरण-शुद्धि में सहायक हवन के लिए वट और पीपल की समिधा का वैज्ञानिक महत्त्व है ।
🚩#नीम : #नीम की #शीतल छाया कितनी सुखद और तृप्तिकर होती है, इसका अनुभव सभीको होगा । #नीम में ऐसी #कीटाणुनाशक शक्ति मौजूद है कि यदि #नियमित #नीम की छाया में दिन के समय विश्राम किया जाय तो सहसा कोई #रोग होने की सम्भावना ही नहीं रहती ।
🚩#नीम के अंग-प्रत्यंग (पत्तियाँ, फूल, फल, छाल, लकडी) उपयोगी और औषधियुक्त होते हैं । इसकी कोंपलों और पकी हुई पत्तियों में #प्रोटीन, कैल्शियम, लौह और विटामिन ‘ए पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं ।
🚩#नोट : #नीलगिरी के वृक्ष भूल से भी न लगायें, ये जमीन को बंजर बना देते हैं । जिस #भूमि पर ये लगाये जाते हैं उसकी शुद्धि 12 वर्ष बाद होती है, ऐसा माना जाता है । इसकी #शाखाओं पर ज्यादातर पक्षी घोंसला नहीं बनाते, इसके मूल में प्रायः कोई प्राणी बिल नहीं बनाते, यह इतना हानिकारक, जीवन-विघातक वृक्ष है।
🚩 हे समझदार मनुष्यो ! पक्षी एवं प्राणियों जितनी अक्ल तो हमें रखनी चाहिए । हानिकर वृक्ष हटाओ और तुलसी, पीपल, नीम, वटवृक्ष, आँवला आदि लगाओ । (सोस्त्र : संत श्री आसारामजी आश्रम से प्रकाशित ऋषि प्रसाद अगस्त 2009 )
🚩आपको बता दें कि सभी वृक्ष दिन में #कार्बन डाइऑक्साइड शोषते है और #ऑक्सीजन छोड़ते है लेकिन #पीपल एक ऐसा वृक्ष है कि दिन रात 24 घण्टे #कार्बन डाइऑक्साइड लेता है और ऑक्सीज छोड़ता है ।
🚩इसलिये #दिल्ली और #केंद्र #सरकार अगर सचमुच में दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाना चाहती है तो अधिक से अधिक #दिल्ली में #तुलसी, #पीपल, #नीम, #वटवृक्ष, #आँवला के #वृक्ष तुंरन्त #लगायें ।
🚩#दिल्ली की जनता भी अपने घर में छोटा सा #पीपल का और #तुलसी का पौधा अवश्य रखें ।
🚩#दूसरा उपाय शीघ्र अपनाएं !!
🚩#गौ माता का #गौ-झरण और #गोबर अत्यंत पवित्र माना गया है । #गाय के गोबर में घी डालकर धुँआ करें तो वातावरण में ऑक्सीजन की बढोति होगी और हानिकर बैक्टेरिया मर जायेगें ।
🚩#प्रसिद्ध वैज्ञानिक G E Biged (Italy)- ने भी बताया कि #गाय के गोबर से टी.बी.तथा मलेरिया के कीटाणु मर जाते हैं ।
🚩#गाय के घी के हवन करने से 1 टन प्राणवायु #ऑक्सीजन पैदा होता है जो वातावरण में फैले परमाणु विकिरणों को दूर करने की अदभुत क्षमता रखता है। 
🚩#अमेरिका केंसर की दवा बनाने के लिए #भारत से #गौमूत्र आयात करता है ।
🚩ऐसे पवित्र #गौ-झरण का छिड़काव करने से वातावरण में हानिकारण बैक्टेरिया नाश हो जाते हैं ।
🚩आज की चका-चौंध के युग में हम #ऋषि-मुनियों की परंपरा को भूल गए है इसलिए आज हर व्यक्ति बीमार,परेशान चिंतित रहता है । अभी हमे #ऋषि-मुनियों की बताई पद्धति अनुसार चलना होगा तभी देश का वास्तविक विकास हो पायेगा और हर व्यक्ति स्वथ्य सुखी और सम्मानित जीवन जी सकेगा ।
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Tuesday, November 14, 2017

धर्मान्तरण कराने पर होगी पांच साल की जेल और जुर्माना : राजस्थान सरकार


नवम्बर 14, 2017

धर्म परिवर्तन अपने आप में गुनाह है जिसमें कानून को नजरअंदाज कर हिन्दू समुदाय के लोगों को लालच देकर या जबरन मजबूर कर धर्मातरण करा दिया जाता है। धर्म परिवर्तन के लिए सख्त कानून और नियम बनाए गए हैं पर फिर जिहादी समुदाय के लोग कानून से बेखौफ होकर ईसाई और इस्लाम फैलाने की रणनीति में इतना आगे बढ़ चुके हैं कि हिन्दू समुदाय को मजबूर कर दिया जाता है। 

जहाँ धर्मातरण की संख्या बढ़ती हुई नजर आ रही है वहीं राजस्थान की राज्य सरकार ने इसको मद्दे नजर रखते हुए कई ठोस कदम लिए हैं। जिसमें जबरदस्ती धर्मांतरण कराने में 5 साल की सजा हो सकती है।

 आपको बता दें अभी हाल ही में जोधपुर में एक 22 वर्ष की हिन्दू युवती को जबरदस्ती इस्लाम में परिवर्तन करने में एक जिहादी युवक द्वारा मजबूर किया गया।

जिसके बाद राज्य सरकार इस मामले में सख्ती से हरकत में आ गई। 11 साल तक कांग्रेस के विरोध की वजह से अटके राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को राष्ट्रपति से मंजूरी मिल सकती है। जबरन धर्म परिवर्तन कराने में कई कानून लागू किए जाएंगे। 

राजस्थान सरकार का दावा है कि धर्मांतरण को लेकर बनाए गए उनके बिल के प्रोविजन बहुत सख्त हैं। जिसमें जबरन 18 साल से कम किसी भी बच्चे का धर्मांतरण कराना कानून के सख्त खिलाफ है। जबरन, लालच देकर या धोखे से धर्मांतरण कराने में तीन साल की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माना रखा गया है। बच्चों, महिला, एससी-एसटी के शख्स के धर्मांतरण पर बिल में दो से पांच साल की सजा और 50 हजार जुर्माना है ।

राजस्थान सरकार ही नही बल्कि झारखंड सरकार पहले से ही इस पर सतर्क है झारखंड धर्म स्वतंत्र  विधेयक के धारा-3 में #बलपूर्वक #धर्मांतरण को #गैरकानूनी बताया गया है और इसका उल्लंघन करनेवाले आरोपी को 4 साल जेल और 1 लाख जुर्माना तक होगा । अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करता है तो प्रशासन को सूचित करना होगा ।

आपको बता दें कि झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि कुछ लोग हमारी दिव्य संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं । लालच या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं जो अपराध है ।  हिन्दू धर्म और #सनातन #संस्कृति पर चोट या आंच पहुंचाने की कोशिश करने वाले पादरियों को जेल भेजेंगे ।

धर्मांतरण से मालामाल हुए चर्च और एनजीओ 

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवरदास ने कुछ दिन पहले बताया था कि, धर्मांतरण से जनजातीय समाज को कोई लाभ नहीं पहुंचा है। तथापि, इससे कुछ एनजीओ और चर्च जरूर मालामाल हुए हैं। उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाने का टास्क भाजपा जिलाध्यक्षों और जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष को सौंपा है। उन्होंने सभी से इस पर कड़ी नजर रखने को कहा। साथ ही, जबरन धर्मांतरण की कहीं भी शिकायत मिलने पर सरकार को तत्काल सूचना देने को कहा। उन्होंने हाल ही में लागू धर्म स्वतंत्र कानून की जानकारी देते हुए कहा कि, जबरन धर्मांतरण की सूचना पर सरकार तुरंत कार्रवार्इ करेगी।

मुख्यमंत्री जी ने बिलकुल सही कहा है क्योंकि पूरी दुनिया मानती है कि #हिन्दू #धर्म सबसे श्रेष्ठ है और जो उनको ही लालच देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं उनकी तो जेल में ही जगह होनी चाहिये ।

Five years of imprisonment Penalty for conversion : Rajasthan Government

आपको बता दें कि रोमन #केथोलिक चर्च का एक छोटा राज्य है जिसे वेटिकन सिटी बोलते हैं । अपने धर्म (ईसाई) के प्रचार के लिए वे हर साल​ 17 हजार करोड़ डॉलर खर्च करते हैं । ऐसे ही मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए सऊदी अरब आदि मुस्लिम देश भी लव जिहाद आदि करने के लिए भारी फंडिग करते है ।

 #वेटिकन के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है कि उनके कितने व्यापार चलते हैं ।

ईसाई पादरी मौलवी छोटे #बच्चे- बच्चियों के साथ #दुष्कर्म करते हैं लेकिन उनके खिलाफ #मीडिया कुछ नही बोलती बल्कि उनका पक्ष लेती है क्योंकि 90% मीडिया ईसाई मिशनरियों के फंड से चलती है ।

लेकिन जब कोई हिन्दू साधु-संत या हिन्दू संगठन या सरकार भोले-भाले #हिन्दुओं को #पैसा, #दवाई, कपड़े आदि देकर धर्मान्तरण के खिलाफ मुहिम चलाते हैं तो देशद्रोही और बिकाऊ मीडिया उनके खिलाफ देश में एक माहौल बनाकर उनकी छवि को धूमिल कर देते हैं ।

ईसाई धर्मान्तरण पर रोक लगाने और हिंदुओं की घरवापसी कराने वाले #जयेन्द्र सरस्वती, संत #आसारामजी बापू, स्वामी असीमानन्द जैसे अनेक हिन्दू संतों को जेल भेज दिया गया और स्वामी #लक्ष्मणानन्द जी की तो हत्या करवा दी गई । ऐसे जो भी धर्मान्तरण के खिलाफ आवाज उठाता है उनको जेल भेज दिया जाता है या तो हत्या करवा दी जाती है । ये देश में बहुत बड़ा #षडयंत्र चल रहा है और हिन्दुओं का दिन-रात धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।

झारखंड और राजस्थान सरकार धन्यवाद के पात्र हैं जो धर्मान्तरण करवा रहे हैं उन्होंने उनके खिलाफ अपनी मुहीम चलाई है ।

ऐसे में #केंद्र_सरकार को आगे आना चाहिये और देशभर में #धर्मान्तरण के खिलाफ कानून पारित कर देना चाहिए और जो भी धर्मान्तरण करता हुआ पाया जाये उसको आजीवन जेल भेज देना चाहिए जिससे #धर्म #सुरक्षित हो, देश सुरक्षित हो ।


धर्मांतरण का विरोध करने के लिए आप क्या कर सकते है ?

१. अपने शहर / गांव में यदि कोर्इ मिशनरी संस्था हिन्दुआें को लालच देकर उन्हें धर्म-परिवर्तन करने के लिए कह रही हो, तो उसकी शिकायत तुरंत पुलिस में करें !

२. अपने क्षेत्र में सभी को र्इसार्इयों द्वारा हो रहे धर्मांतरण के विषय में जागृत करें ।

३. साथ ही कोर्इ भी हिन्दू धर्मांतरण की बलि ना चढें, इसके लिए प्रत्येक हिन्दू धर्मशिक्षा लें । इस विषय में विस्तृत लेख आप यहां पढ सकते है आैर उसे अपने मित्र-परिवार को शेअर भी कर सकते है : https://www.hindujagruti.org/hindi/hindu-issues/conversion
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Monday, November 13, 2017

वेटिकन में सबसे बड़े कैथोलिक चर्च में लाखों बच्चों के साथ मिला अश्लीलता का वीडियो

अक्टूबर 13, 2017   www.azaadbharat.org
🚩वेटिकन सिटी के फंडिग की लालच में मीडिया भले हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं, पर्व-त्यौहारों, साधु-संतों, मंदिर-आश्रमों को बदनाम करें लेकिन आश्चर्य में डाल देगी आपको वेटिकन सिटी की खुद की सच्चाई !!
🚩वेबसाइट nnettle.com में चर्च के बारे में जो छपा है वो हैरान करने वाला है कि कैसे धर्म के नाम पर ईसाई पादरी बच्चों के साथ दुष्कर्म जैसे घिनौने कृत्य करते हैं ।
🚩वेटिकन में सबसे बड़ा कैथोलिक चर्च पीडोफाइल है।
🚩जहाँ कैथोलिक चर्च लिपिक पीडोफिलिया के अपने निरंतर प्रदर्शन को रोकने के लिए लड़ाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जासूसों ने वेटिकन के भीतर की गई फोटो, वीडियो और अन्य स्पष्ट सामग्री सहित बाल अश्लील साहित्य की एक "अभूतपूर्व" मात्रा का पर्दाफाश किया है।

unprecedented-amount-of-child-porn-discovered-in-the-Vatican

🚩वेटिकन प्रमोटर ऑफ जस्टिस, जियान पिएरो मिलानो ने इन आरोपों के जवाब में एक रिपोर्ट जारी की जो उन्होंने न्यायिक समारोह के दौरान कैथोलिक चर्च के अधिकारियों के समक्ष पूरी पढ़ी ।
🚩मिलानो का दावा है कि कैथोलिक चर्च की आंतरिक जांच प्रोटोकॉल के कारण, वह वास्तव में पीडोफिलिया और बाल अश्लीलता रखने के अभियुक्त लोगों के नाम बताने का उनका कोई कानूनी दायित्व नहीं है।
🚩हालांकि, होली सी के प्रवक्ता फेडेरिको लोम्बार्डी ने खुलेपन का एक दुर्लभ प्रदर्शन दिखाया और आर्कबिशप जोसेफ वेसोलोव्स्की का नाम आरोपी में से एक के रूप में दर्ज किया, जिनसे जांच शुरू हुई थी।
🚩यद्यपि यह वेटिकन द्वारा एक आगामी संकेत की तरह लग सकता है,  लेकिन 2014 में पहले ही खबरों का खुलासा हुआ था जिसमें न केवल वेसोलोव्स्की ( Wesolowski ) के कब्जे में 100,000 से अधिक ऐसे छवियों और वीडियो का मिलना जिसमे बच्चों को यौन क्रिया करने में मजबूर किया जा रहा है, परन्तु वेसोलोव्स्की द्वारा पोलैंड और डोमिनिकन गणराज्य में कई बच्चों को यौन शोषण करना भी शामिल था ।
🚩वेटिकन की आंतरिक नीतियों के कारण, वेसोलोव्स्की की जांच हुई थी। लेकिन "अपनी सुरक्षा" के लिए जेल जाने से बच गया।
🚩चर्च द्वारा उठाए गए  असामान्य कदम में,  इस उच्च श्रेणी के कैथोलिक आधिकारियों के अपराधों के लिए वेटिकन के अभियोजन से मुकदमा चलाया गया था  और उसे "सुरक्षात्मक" घर गिरफ्तारी के तहत रखा गया था, लेकिन इससे पहले कि मामला भी "कोर्टरूम" तक पहुंचता, उससे पहले वो रहस्यमय तरीके से मर गया।
🚩उनकी मृत्यु के बाद न्याय की कमी ने कई पीड़ितों को सुझावों से निराश कर दिया कि घर गिरफ्तारी के लिए एकमात्र कारण यह तथ्य, खबर का खुलासा था कि, डोमिनिकन गणराज्य में मुकदमा चलाने से बचने के लिए वेटिकन अधिकारियों द्वारा वेसोलोव्स्की को चुपचाप से वापस कैथोलिक शहर-राज्य तक ले जाया गया था, उसे बाद में मुफ्त में घूमने की इजाजत थी।
🚩चर्च और राज्य के अनुसार, वास्तव में वेसोलॉव्स्की के कंप्यूटर पर जो कुछ पाया गया था, उसका वर्णन घृणास्पद था:
🚩कैमरे के सामने हस्तमैथुन करने और एक दूसरे से सेक्स करने के लिए मजबूर किये गए किशोरों के 160 से अधिक वीडियो थे।
🚩इसके अलावा, किशोरों पे बलात्कार किया था और तो और उन्हें वयस्कों के साथ यौन कृत्य करने के लिए मजबूर किया था।
🚩वेसोलोव्स्की अपने बाल अश्लीलता संग्रह के बारे में सुरक्षात्मक था, 86000 से अधिक छवियों उनके द्वारा अवरोधित फ़ोल्डर में वर्गीकृत और दर्ज किया गया था।
🚩कंप्यूटर पर मौजूद छवियों और वीडियो के अलावा, कम से कम 45,000 अन्य पहले से ही हटाए जा चुके थे।
🚩यह अच्छा आर्चबिशप ये सुनिश्चित करना चाहता था कि प्रवास के दौरान को बाल अश्लीलता से वंछित नहीं रहे, इसलिए वो एक लैपटॉप साथ में रखता था जिसमें और भी ज्यादा अश्लील फोटो और वीडियो थे।
🚩यह काफी ठेठ लगता है कि इस नए बाल पोर्न डिस्कवरी केस में केवल आरोपी पार्टी का नाम रखा गया है, जो पहले से ही उजागर किया गया है और उसका निधन हो गया है, अन्य आरोपियों की पहचान गोपनीय रखी है।
🚩गार्डियन के मुताबिक, बाल अश्लीलता के मामलों से परे, वेटिकन अधिकारी मादक पदार्थों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई अपराधों से जूझ रहे हैं।
🚩वेटिकन को संबोधित नशीली दवाओं की तीन डाक-वितरण को 2014 में रोक दिया गया था जिसमें कोकेन से भरे कंडोम युक्त पैकेट भी शामिल थे ।
🚩जर्मनी की लीपज़िग हवाई अड्डे पर ड्रग्स की खोज की गई और खरीदार को फंसाने की आशा में वेटिकन को सौंप दिया गया, लेकिन कोई भी सामान पर दावा करने के लिए आगे नहीं आया।
🚩आपराधिक गतिविधियों की सरणी के बावजूद, हाल के वर्षों में वेटिकन के जेल में केवल छह लोग ही पहुंचे ।
🚩इनमें सेंट पीटर की बेसिलिका के ऊपर चढ़ने वाले एक इतालियन प्रदर्शनकार मार्सेलो डी फिनिज़ियो, और एक फ़ेमेन कार्यकर्ता इयाना अज़जानोवा शामिल हैं, जिन्होंने अपने स्तनों का प्रदर्शन करते हुए वेटिकन के जन्म के दृश्य से एक बाल यीशु की प्रतिमा को पकड़ लिया।
🚩जो #ईसाई #पादरी खुद #दुष्कर्म में लिप्त है वो ही भारत में आकर अपना धर्म महान बताकर लालच देकर हिन्दुओं का #धर्मपरिवर्तन #करवाते हैं और #मीडिया भी ईसाई #पादरियों का #दुष्कर्म #नहीं #बताती है और न ही उनके चर्च के में हो रहे योन शोषण के बारे में बताती है, सिर्फ पवित्र हिन्दू #साधु-संतों को ही #बदनाम करती है, #वेटिकन सिटी के इशारे पर ।
🚩पाठक खुद विचार करें कि आखिर क्यों सिर्फ और सिर्फ मीडिया में हिन्दू साधु-संतों की छवि ही धूमिल की जाती है । अभी हाल ही में कर्नाटक की मैसूर #न्यायालय ने #स्वामी नित्यानंद के खिलाफ #झूठी #गवाही देनेवाले #विनय भारद्वाज पर #2.75 करोड़ रुपए का #जुर्माना लगाया है ।
🚩पर जितना मीडिया ने उनको बदनाम किया क्या उसका चौथा हिस्सा भी इस न्यूज को हाईलाइट किया गया ?
🚩आखिर कबतक शिकार होंगे भारतवासी ऐसी बिकाऊ मीडिया के ???
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