Friday, June 23, 2017

ईसाई मिशनरियां दलित एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम पुरजोश से कर रही हैं

ईसाई मिशनरियां दलित एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम पुरजोश से कर रही हैं

जून 23, 2017

विश्रामपुर (झारखंड) : भूत प्रेत से शांति दिलाने के नाम पर ईसाई मिशनरियां दलित पिछड़े वर्ग एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का जोरशोर से काम कर रही हैं । पिछले दिनों राज्यस्तरीय पार्टी कार्यकर्ता की बैठक में धर्मांतरण पर सक्त कानून बनाने की बात मुख्यमंत्री #रघुवर दास की ओर से कही गई थी। परंतु इसका कोई प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ा । धर्मांतरण का खेल चरम सीमा पर है। कुछ बिचौलिये भोले भाले गरीब परिवार को लालच देकर अपने लक्ष्य में सफल हो रहे हैं। इसमें विश्रामपुर व नावा बाजार थाना क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं है।
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थाना क्षेत्र के #उमेश चौधरी, #सुगेंद्र उरांव, #विजय राम व तोलरा गांव से #गणेश उरांव, #चतुगुण उरांव जैसे दर्जनों लोगों ने बातचीत के क्रम में स्वीकार किया है कि धर्मांतरण के बाद उन्हें भूत प्रेत से शांति मिली है। नावाबाजार थाना क्षेत्र के तुकबेरा गांव निवासी बिशुनदेव भुइयां ने बताया कि, उनकी पत्नी का दो बार गर्भपात हो गया था। पुत्र प्राप्ति के मोह में ईसाई धर्म स्वीकार करने को कहा गया है और वे धर्मांतरित भी हो गए ।

#धर्मांतरण करने वाले कुछ लोग शहर में किराए के मकान में रहते हैं। साथ हीं अपने आप को ऊंची जाति का हवाला देकर कहते हैं कि, हमने ईसाई धर्म अपना लिया है तो तुम दलित पिछड़े लोग अपनाने से क्यों परहेज कर रहे हो..??
                 इसमें कोई पाप नहीं। लोगों को बताया जाता है कि प्रभु यीशु से तुम्हारा सम्पर्क होगा । घर में सुख शांति आएगी। सभी प्रकार के दर्द पीड़ाएँ दूर होंगी । इसके साथ साथ लोगों को कहा जाता है कि ईसाई धर्म ही बड़ा धर्म है।

तुकबेरा गांव के एक भुईयां परिवार ने सोशल मीडिया पर उपलब्ध एक विडियो में स्वीकार किया है कि ईसाई धर्म अपनाने से दर्द पीड़ाएं भूत- प्रेतो से शांति मिलती है। चर्च में गरीबों को मुर्गा भात खिलाकर उन्हे धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। राजहारा कोठी निवासी सुमंत साव के पूरा परिवार ने इसलिए हिन्दू धर्म त्याग कर दिया कि भूत प्रेत से शांति चाहिए थी। जो ईसाई धर्म अपनाने से मिली। जब ईसाई धर्मांतरण से दर्द पीड़ा व भूत-प्रेत से शांति मिलती है तो सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर किया जा रहा करोडो़ का खर्चा बेमानी है।

इस क्षेत्र में #धर्मांतरण कर ईसाई बनाने का खेल वर्षों से चल रहा है। परंतु तीन वर्षों से क्षेत्रों में धर्मांतरण का कार्य हावी है। इससे पूर्व ईसाई बने लोग मेदिनीनगर जाकर रविवार को प्रार्थना करते थे। बढ़ती संख्या को देखते हुए धर्म के दलाल स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि से संपर्क स्थापित किए। जिसने लालच में आकर प्रत्येक रविवार को सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थना की अनुमति दे दी। पिछले साल 2015 में गांव में एक विशाल गिरजाघर बना दिया गया। जहां प्रत्येक रविवार को प्रार्थना कराई जाती है। साथ ही बाहर से आने वाले फादर या पास्टर अंधविश्वास से जकडे़ लोगों को धर्म अपनाने के बाद मुक्त होने की बात कहते हैं। जिसके बहकावे में लोग आ रहे हैं।

#धर्मांतरण के विरुद्ध #कार्रवाई की मांग

प्रखंड के #अनुसूचित जाति, जन जाति व पिछड़ी जाति के लगभग तीन सौ लोगों ने धर्मातरण कर लिया है। इसके विरुद्ध कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने की है। इनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों ने आदिम जनजाति,अनुसूचित जाति-जनजाति और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को विदेशी धन के बल पर प्रलोभन देकर धर्मांतरित करने का अभियान चलाया है। नावाबाजार थाना क्षेत्र के राजहारा कोठी, तुकबेरा, छतवा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। 

उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में एक रणनीति के तहत भोले-भाले लोगों को #शिक्षा एवं #स्वास्थ्य सेवा की आड़ में चंगाई करिश्मा दिखाकर #धर्मातरित किया जा रहा है। इसके कारण गांवों का समीकरण बदल गया है। राजहारा जैसे हिन्दू बहुल गांव में चर्च बन गए। प्रशासन अनभिज्ञ बना हुआ है। धर्मातरण से संबंधित संस्था या व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही।

नावा बाजार के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक चौपडा ने कहा कि, भूत प्रेत जैसे अंधविश्वास के नाम पर झूठे भ्रम फैलानेवाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में धर्मांतरण की जानकारी नहीं मिली है। संज्ञान में आने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। स्थानीय लोगों से इसकी समुचित जानकारी ली जा रही है।

 स्त्रोत : जागरण

विदेश के फिलॉसफर #नित्शे ने बताया कि मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमें आंतरिक #विकृति की पराकाष्ठा है । वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है । इस भयंकर विष का कोई मारण नहीं । #ईसाईत गुलाम, क्षुद्र और #चांडाल का पंथ है । 

 #एच.जी.वेल्स ने भी लिखा था कि दुनिया की सबसे बड़ी बुराई है रोमन #कैथोलिक चर्च ।  

#डॉ. एनी बेसेन्ट लिखते हैं कि मैंने 40 वर्षों तक विश्व के सभी बड़े धर्मो का अध्ययन करके पाया कि हिन्दू धर्म के समान पूर्ण, महान और वैज्ञानिक धर्म कोई नहीं है ।

2017 साल पुराना, गौ मांस खाने वाला, शराब पीने वाला, छोटे-छोटे बच्चों के साथ कुकर्म करने वाला ईसाई धर्म बड़ा है या सबको सुखी स्वस्थ और सम्मानित जीवन जीने देने वाला सनातन धर्म बड़ा???

आपको बता दें कि अक्टूबर 2016 को #झारखंड के मुख्यमंत्री #रघुवर दास ने कहा था कि कुछ लोग हमारी हिन्दू संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं । लालच या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध है ।

मुख्यमंत्री ने लोगों को कहा कि हिन्दू धर्म और #सनातन #संस्कृति पर चोट या आंच पहुंचाने की कोशिश करने वालों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करो ।

पूरी दुनिया मानती है कि #हिन्दू #धर्म सबसे श्रेष्ठ है और जो उनको ही लालच देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं उनकी तो जेल में ही जगह होनी चाहिये ।
ये मुख्यमंत्री जी ने बिलकुल सही कहा है ।

जैसा कि हमने पहले भी बताया है कि रोमन #केथोलिक चर्च का एक छोटा राज्य है जिसे वेटिकन सिटी बोलते हैं । अपने धर्म (ईसाई) के प्रचार के लिए वे हर साल करीब​ 17 हजार करोड़ डॉलर खर्च करते हैं । 

वेटिकन के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है कि उनके कितने व्यापार चलते हैं ।

रोम शहर में 33% #इलेक्ट्रॉनिक , प्लास्टिक, #एयर लाइन, #केमिकल और इंजीनियरिंग बिजनेस वेटिकन के हाथ में हैं ।

दुनिया में सबसे बड़े #Shares​ वेटिकन के पास हैं ।

इटालियन #बैंकिंग में उनकी बड़ी संपत्ति है और अमेरिका एवं स्विस बैंकों में उनकी बड़ी भारी deposit है । 

ज्यादा जानकारी के लिए पुस्तक #VATICANEMPIRE पढ़े !!

आपको बता दें कि ईसाई पादरी छोटे #बच्चे- बच्चियों के साथ #दुष्कर्म करते हैं लेकिन उनके खिलाफ #मीडिया कुछ नही बोलती बल्कि उनका पक्ष लेती है क्योंकि 90% मीडिया ईसाई मिशनरियों के फंड से चलती है ।

लेकिन जब कोई हिन्दू साधु-संत या हिन्दू संगठन या सरकार भोले-भाले #हिन्दुओं को #पैसा, #दवाई, कपड़े आदि देकर धर्मान्तरण के खिलाफ मुहिम चलाते हैं तो देशद्रोही और बिकाऊ मीडिया उनके खिलाफ देश में एक माहौल बनाकर उनकी छवि को धूमिल कर देते हैं ।

ईसाई धर्मान्तरण पर रोक लगाने और हिंदुओं की घरवापसी कराने वाले #जयेन्द्र सरस्वती, संत #आसारामजी बापू, स्वामी असीमानन्द जैसे अनेक हिन्दू संतों को जेल भेज दिया गया और स्वामी #लक्ष्मणानन्द जी की तो हत्या करवा दी गई । ऐसे जो भी धर्मान्तरण के खिलाफ आवाज उठाता है उनको जेल भेज दिया जाता है या तो हत्या करवा दी जाती है ।
ये देश में बहुत बड़ा #षडयंत्र चल रहा है । हिन्दुओं का दिन-रात धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।

#केंद्र_सरकार को आगे आना चाहिये और #धर्मान्तरण के खिलाफ कानून पारित कर देना चाहिए और जो भी धर्मान्तरण करता हुआ पाया जाये उसको आजीवन जेल भेज देना चाहिए जिससे #धर्म #सुरक्षित हो, देश सुरक्षित हो ।

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Thursday, June 22, 2017

दस साल बाद सामने आया 'समझौता ब्लास्ट' का सच

🚩 *दस साल बाद सामने आया 'समझौता ब्लास्ट' का सच, पाकिस्तानी को बचाया, हिंदुस्तानी को फंसाया*

जून, 22, 2017
p chidambaram samjhauta express blast

🚩नई दिल्ली: #समझौता ब्लास्ट केस में एक बड़ा खुलासा हुआ है। समझौता ब्लास्ट केस को बहाना बनाकर हिन्दू #आतंकवाद का जुमला इजाद किया गया। पाकिस्तानियों को बचाने के लिए और हिन्दुस्तानियों को फंसाने के लिए 2007 में हुए #समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट का इस्तेमाल किया गया। इस केस में पाकिस्तानी #आतंकवादी पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था लेकिन महज 14 दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया। इसके बाद इस केस में #स्वामी असीमानंद जी को  फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद को अमली जामा पहनाया जा सके।

🚩#समझौता केस के जांच अधिकारी का खुलासा :

🚩हादसा 10 साल पुराना है लेकिन ये खुलासा सिर्फ बारह दिन पहले हुआ, जब जांच अधिकारी ने अदालत में अपना बयान दर्ज करवाया। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि पाकिस्तानी #आतंकवादी को छोड़ने का आदेश देने वाला कौन था?
🚩किसने पाकिस्तानी आतंकवादी को छोड़ने के लिए कहा, वो कौन है जिसके दिमाग में भगवा आतंकवाद का खतरनाक आइडिया आया...

🚩18 फरवरी 2007 को #समझौता एक्सप्रैस में ब्लास्ट हुआ था इसमें 68 लोग मारे गए। दस साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अबतक आखिरी फैसला नहीं आया है। इस केस में दो पाकिस्तानी संदिग्ध पकड़े गए, इनमें से एक ने गुनाह कबूल किया लेकिन पुलिस ने सिर्फ 14 दिन में जांच पूरी करके उसे बेगुनाह करार दिया। अदालत में पाकिस्तानी संदिग्ध को केस से बरी करने की अपील की गई और अदालत ने पुलिस की बात पर यकीन किया और पाकिस्तानी संदिग्ध आजाद हो गया। फिर कहां गया ये किसी को नहीं मालूम....क्या ये सब इत्तेफाक था या फिर एक बड़ी राजनीतिक साजिश थी?

🚩इस केस से जुड़े #डॉक्युमेंट्स सामने आए हैं जिसे देखने के बाद कोई भी सोचने पर मजबूर हो जाये कि उस समय की सरकार को #2 पाकिस्तानी संदिग्ध को छोड़ने की इतनी जल्दी क्यों थी ?
फिर अचानक इस केस में हिन्दू आतंकवाद कैसे आ गया?

🚩इस केस के पहले इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर थे इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह जो कि अब रिटायर हो चुके हैं। गुरदीप सिंह ने 9 जून को कोर्ट में अपना बयान रिकॉर्ड करवाया है।

🚩इस बयान में इंस्पेक्टर #गुरदीप ने कहा है, ‘ये सही है कि समझौता ब्लॉस्ट में पाकिस्तानी अजमत अली को गिरफ्तार किया गया था। वो बिना पासपोर्ट के, बिना लीगल ट्रैवल डाक्यूमेंटस के भारत आया था। दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई शहरों में घूमा था। मैंने अपने सीनियर अधिकारियों, सुपिरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस #भारती अरोड़ा और डीआईजी के निर्देश के मुताबिक #अजमत अली को कोर्ट से बरी करवाया।

🚩इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ने कोर्ट को जो बयान दिया वो काफी हैरान करने वाला है
'ऊपर से आदेश आया, पाकिस्तानी संदिग्ध छोड़ा गया'
पुलिस अधिकारी ऐसा तभी करते हैं जब उन पर ऊपर से दवाब आता है। आखिर इतने सीनियर अधिकारियों को पाकिस्तानी संदिग्ध को छोड़ने के लिए किसने दबाव बनाया? 
एक ब्लास्ट केस में सिर्फ 14 दिन में पुलिस ने ये कैसे तय कर लिया कि आरोपी बेगुनाह है और उसे छोड़ देना चाहिए?

🚩#अजमत अली है कौन?

🚩कोर्ट में जमा डॉक्युमेंट्स के मुताबिक अजमत अली पाकिस्तानी नागरिक था। उसे भारत में अटारी बॉर्डर के पास से GRP ने अरेस्ट किया था। उसके पास न तो पासपोर्ट था, न वीजा था और ना ही कोई लीगल डॉक्यूमेंट। इस शख्स ने पूछताछ में कबूल किया कि वो पाकिस्तानी है और उसके पिता का नाम मेहम्मद शरीफ है। उसने अपने घर का पता बताया था- हाउस नंबर 24, गली नंबर 51, हमाम स्ट्रीट जिला लाहौर, पाकिस्तान।

🚩सबसे बड़ी बात ये है कि ब्लास्ट के बाद दो प्रत्यक्षदर्शियों ने बम रखने वाले का जो हुलिया बताया था वो #अजमत अली से मिलता जुलता था। प्रत्यक्षदर्शी के बताने पर स्केच तैयार किए गए थे, और उस स्केच के आधार पर ही अजमत अली और #मोहम्मद उस्मान को इस केस में आरोपी बनाया गया था। #इंस्पेक्टर गुरदीप ने भी 12 दिन पहले कोर्ट को जो बयान दिया था उसमें कहा है कि ट्रेन में सफर कर रहीं शौकत अली और रुखसाना के बताए हुलिए के आधार पर दोनों आरोपियों के स्केच बनाए गए थे।

🚩समझौता ब्लास्ट 18 फरवरी 2007 को हुआ था। पुलिस ने $अजमत अली को एक मार्च 2007 को अटारी बॉर्डर के पास से बिना लीगल डॉक्युमेंट्स के गिरफ्तार किया था। उस वक्त वो पाकिस्तान वापस लौटने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद अजमत अली को अमृतसर की सेंट्रल जेल में भेजा गया। वहीं से समझौता ब्लास्ट की जांच टीम को बताया गया था कि समझौता ब्लास्ट के जिन संदिग्धों के उन्होंने स्केच जारी किए हैं उनमें से एक का चेहरा अजमत अली से मिलता है। इसके बाद लोकल पुलिस ने अजमत अली को कोर्ट में समझौता पुलिस की जांच टीम को हैंडओवर कर दिया।

🚩जांच टीम ने 6 मार्च 2007 को कोर्ट से अजमत अली की 14 दिन की रिमांड मांगी। जो ऐप्लिकेशन पुलिस ने कोर्ट में जमा की थी, इस एप्लिकेशन में जांच अधिकारी ने साफ साफ लिखा है कि समझौता ब्लास्ट मामले में गवाहों की याददाश्त के मुताबिक संदिग्धों के स्केचेज बनाकर टीवी और अखबारों को जारी किए गए थे। #अटारी जीआरपी ने इस स्केच से मिलते जुलते संदिग्ध अजमत अली को गिरफ्तार किया। इसने पूछताछ में बताया कि वो तीन नवंबर 2006 को #बिना पासपोर्ट और वीजा के भारत आया था। इसी आधार पर कोर्ट ने अजमत अली को 14 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया था।

🚩अबतक की कहानी साफ है समझौता ट्रेन में ब्लास्ट हुआ, इस ब्लास्ट के दो आईविटनेसेज ने ट्रेन में बम रखने वालों का हुलिया बताया, उसके आधार पर दो लोगों के स्केच बने, उन्हें अटारी रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया और फिर पूछताछ करने के बाद समझौता ब्लास्ट की जांच कर रही टीम को सौंप दिया। इस टीम ने भी उसका चेहरा स्केच से मिला कर देखा, चेहरा मिलता जुलता दिखा, तो उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने इसे 14 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया। 14 दिन की पुलिस #रिमांड में पूछताछ हुई।

🚩पूछताछ और जांच के बाद उम्मीद थी कि कुछ कंक्रीट निकल कर सामने आएगा लेकिन 14 दिन बाद, 20 मार्च को जब पुलिस ने दोबारा अजमत अली को कोर्ट में पेश किया तब उम्मीद थी कि पुलिस दोबारा उसका रिमांड मांगेगी, लेकिन हुआ उल्टा। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उनकी जांच पूरी हो गयी है, #अजमत अली के खिलाफ कोई ठोस #सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उसे इस केस से #डिस्चार्ज कर दिया जाए। कोर्ट ने पुलिस की दलील पर भरोसा किया और कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि अजमत अली की रिहाई की अर्जी पुलिस ने ये कहते हुए दी है कि मौजूदा केस की जांच में इसकी कोई जरूरत नहीं है। जब जांच टीम ने ही ये कह दिया तो कोर्ट ने अजमत अली को रिहा कर दिया।

🚩करनाल में इंडिया टीवी रिपोर्टर #चंदर किशोर को गुरदीप सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच के बाद ही अजमत को छोड़ दिया गया था। उन बड़े अफसरों के बारे में भी बताया जो इस टीम का हिस्सा थे जिन्होंने इस केस की जांच की और पाकिस्तानी नागरिक को छोड़ा । 

🚩अब यहां एक बड़ा सवाल तो यह है कि इतने सारे शहरों में पुलिस ने जांच सिर्फ 14 दिन में कैसे पूरी कर ली। अजमत अली का न तो नार्को टेस्ट हुआ, न ही पोलीग्राफी टेस्ट किया गया। सिर्फ 14 दिन की पूछताछ के बाद पुलिस ने ये मान लिया कि समझौता ब्लास्ट में अजमत अली का हाथ नहीं है...ये शक को पैदा करता है।

🚩अजमत अली को छोड़ देना तो एक बड़ा ट्विस्ट था लेकिन इससे भी बड़ा ट्विस्ट इस केस की शुरुआती जांच में आया था। शुरुआत में उस वक्त की #कांग्रेस सरकार ने कहा था कि #समझौता ब्लास्ट के पीछे #लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है लेकिन जांच बढ़ने के कुछ ही दिन बाद इस केस में भगवा आतंकवाद का नाम आया।

🚩इस केस में शुरुआत में जांच में जल्दी-जल्दी ट्विस्ट आए इसपर हमारे कुछ सवाल हैं...

🚩क्या एक पाकिस्तानी नागरिक जो बम धमाके का आरोपी हो उसे इतनी आसानी से छोड़ा जा सकता है? अक्सर छोटे क्राइम में भी पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक की जांच में भी ऐसी जल्दीबाजी नहीं होती उससे पूछताछ होती है, उसकी बातों को वैरीफाई किया जाता है लेकिन समझौता ब्लास्ट के केस में अजमत अली को तुरंत छोड़ दिया गया।

🚩आखिर सरकार की तरफ से अजमत को छोड़ने की ऐसी जल्दबाजी क्यों की गयी? क्या पुलिस को अजमत अली का नार्को या पोलीग्राफी टेस्ट करके सच निकलवाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए थी? पहले जब इंटेलिजेंस और जांच एजेंसियों ने इस धमाके को लश्कर का मॉड्यूल बताया तो फिर एकाएक इसे हिंदू टेरर का नाम कैसे दिया गया?

🚩हम आपको बताते है कि हिंदू टेरर का नाम कैसे आया, इसका जवाब भी पुलिस अधिकारियों की एक मीटिंग की नोटिंग में मिला। 21 जुलाई 2010 को बंद कमरे में कुछ अधिकारियों की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में ये तय हुआ था कि हरियाणा पुलिस द्वारा समझौता एक्सप्रैस ब्लास्ट की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है इसलिए इसे नेशनल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी को सौंप देना चाहिए। इसी मीटिंग में ये बात भी हुई थी कि इस केस की जांच हिंदू ग्रुप के इन्वॉल्वमेंट पर भी होना चाहिए। नोटिंग में लिखा है कि एसएस (आईएस) को याद होगा, उनके चेंबर में इस बात पर डिस्कशन हुआ था, कि इसकी जांच हिंदू ग्रुप के ब्लास्ट में शामिल होने की संभावना पर भी होनी चाहिए।

🚩पुलिस की नोटिंग से सवाल ये उठता है कि  किसके कहने पर हिंदू टेरर ग्रुप का नाम इस धमाके से जोड़ने का आइडिया आया? 
बंद कमरे में वो कौन-कौन ऑफिसर थे जिन्होंने इस धमाके को हिन्दू टेरर का एंगल देने की कोशिश की? इन अफसरों के नाम सामने आना जरूरी हैं, उनसे पूछताछ होगी, तभी पता चलेगा कि उनपर किसका दबाव था?

🚩बीजेपी नेता #सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि ये देश के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि सिर्फ #हिंदू आतंकवाद का नाम देने के लिए ये पूरी #साजिश रची गयी थी।

🚩आपको बता दें कि तत्कालीन #गृह मंत्री #सुशील कुमार शिंदे ने AICC की मीटिंग में भगवा #आतंकवाद की बात करके सबको चौंका दिया था बाद में #पी चिदंबरम ने और #दिग्विजय सिंह ने बार-बार बीजेपी को बैकफुट पर लाने के लिए इस जुमले का इस्तेमाल किया।

🚩समझौता ब्लास्ट के केस में जिस तरह से पहले लश्कर ए तैयबा का नाम आया फिर उस वक्त की सरकार ने पाकिस्तानियों को छोड़ दिया और स्वामी असीमानंद को आरोपी बनाकर इस केस को पूरी तरह से पलट दिया....इसके पीछे एक सोची समझी साजिश थी।

🚩अब ये साफ है कि भगवा आतंकवाद का जुमला क्वाइन करने के लिए, हिन्दू आतंकवाद का हब्बा खड़ा करने के लिए इस केस में पाकिस्तानियों को बचाया गया और हिन्दुस्तानियों को फंसाया गया। 

🚩अब सवाल सिर्फ इतना है कि इस साजिश के पीछे किसका शातिर दिमाग था ??
क्या पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह या सुशील कुमार शिन्दे में से कोई इस साजिश में शामिल था.....ये सच बाहर आना जरूरी है। 

🚩स्त्रोत्र:इंडिया टीवी

🚩आपको बता दें कि जॉइंट #इंटेलीजेंसी कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. एस.डी. प्रधान ने देश में भगवा आतंक की थ्योरी को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। 

🚩उन्होंने भी स्पष्ट बताया है कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मालेगाँव ब्लास्ट, #इशरतजहाँ मामला का पहले से ही हमें पता था और अमेरिकन खुफिया विभाग ने भी बताया था कि ये सब घटनाएं होने वाली थी और ये पाकिस्तान करवा रहा है और हमने तात्कालीन #गृहमंत्री पी.चिदंबरम को बताया भी था लेकिन उन्होंने राजनैतिक फायदे के लिए भगवा #आतंकवाद सिद्ध करने के लिए #डी.जी.वंजारा, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी #असीमानन्द, #शंकराचार्य अमृतानन्दजी, कर्नल पुरोहित और बाद में दूसरे फर्जी केस बनाकर  हिन्दू संत आसारामजी बापू और उनके बेटे को जेल भेजा गया था ।

 🚩जब साध्वी प्रज्ञा जमानत पर बाहर आई तो कहा कि कांग्रेस के तात्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद की परिभाषा गढ़ी थी और मुझे फंसाने की साजिश की थी लेकिन कोर्ट में इतना तो साबित हो गया कि कोई भगवा आतंकवाद नहीं होता ।

🚩आज भी #कांग्रेस सरकार द्वारा रचे गए #षडयंत्र के तहत कई #हिन्दू साधु-संत जेल में बंद है लेकिन अब #हिंदुत्ववादी कहलाने वाली #BJP सरकार कैसे हिंदुओं के माप-दण्ड पर खरी उतरती है , ये देखना है ।

🚩कब #निर्दोष संतों की जल्द से जल्द सह-सम्मान रिहाई करवाती है उसी पर सभी #हिंदुओं की निगाहें टिकी है ।

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Wednesday, June 21, 2017

सर्व प्रांतों में एक ही अड़चन है कि, हिन्दू बिखरे हुए हैं : विधायक टी. राजासिंह

🚩 *सर्व प्रांतों में एक ही अड़चन है कि, हिन्दू  बिखरे हुए हैं : विधायक टी. राजासिंह* 

जून, 21, 2017
🚩गोवा : तेलंगाना राज्य के #गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र के विधायक #श्री. टी. राजासिंह ने #षष्ठ अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के तृतीय दिन संबोधित करते हुए कहा कि लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’, ऐसा कहने के दिन अब नहीं रहे । #राममंदिर के निर्माण के लिए #हिन्दू-संगठन आवश्यक है । राजकीय, प्रशासकीय आदि किसी भी सहायता के बिना करोडों हिन्दुआें के संगठन से ही #अयोध्या में #राममंदिर का निर्माण होगा ।
T raja singh

🚩#टी. राजासिंह ने आगे कहा, ‘‘सर्व प्रांतों में एक ही अड़चन है कि, हिन्दू  बिखरे हुए हैं । हिन्दू-संगठन में बडी शक्ति है । हिन्दू संगठित होने के कारण ही पिछले 5 वर्षों से भाग्यनगर में एक भी गाय की हत्या नहीं हुई है । अब हम बैलों की भी हत्या न हो, इसके लिए प्रयत्न कर रहे हैं । इसलिए हिन्दुआें को संगठित होना चाहिए । अभी आप हिन्दुत्व का कार्य करने के लिए स्वतंत्र हैं; पर जब आप राजनीति में प्रवेश करते हैं, तब हिन्दुत्व का कार्य करने में अनेक बंधन आते हैं । ‘हिन्दुआें का सर्वनाश करनेवाले अन्य पंथियों के विरुद्ध न बोलें’, #‘राममंदिर, #गोरक्षा इस विषय में न बोलें’, #‘वन्दे मातरम’ न बोलनेवालों के विरोध में कुछ न बोलें’, ऐसी अनेक सूचनाएं ‘ऊपर’ से आने लगती हैं । कुछ लोग जब सत्ता में नहीं होते, तब राममंदिर और गोरक्षा का स्मरण होता है, सत्ता मिलने पर सब भूल जाते हैं । 
🚩ऐसे लोग क्या #राममंदिर की स्थापना कर पाएंगे ? 
जिस राजनीति में राममंदिर बनाने के विषय में  बोला भी नहीं जाता, उस राजनीति का क्या लाभ ?
 🚩राजनीति में आने से पहले  10 बार सोचिए । उससे अच्छा है बडी मात्रा में हिन्दूसंगठन कीजिए । इससे मतों की राजनीति करनेवाला प्रत्येक नेता स्वयं आपके पास आकर आपसे समर्थन मांगेगा ।

🚩विधायक #श्री. टी. राजासिंहजी ने कथनानुसार  राजनीति में रहकर कार्य करने के कुछ कटु अनुभव

🚩इस समय #श्री. टी. राजासिंह ने राजनीति में रहकर $हिन्दुत्वरक्षा के लिए किए साहसी कार्य और उसका पक्षांतर्गत हुआ विरोध, इस विषय में आर्तता ने निम्नलिखित अनुभव बताए । 

🚩1. #केरल में रा.स्व. संघ के कार्यकर्ताआें और #हिन्दुत्वनिष्ठों की #हत्या हो रही है । केरल के मुख्यमंत्री की एक बडी सभा का आयोजन मेरे निर्वाचन क्षेत्र में किया था । हमने पुलिस से कहा, ‘‘केरल के मुख्यमंत्री के सभास्थल के निकट मेरा भी व्यासपीठ होगा । वहां से हम गोरक्षा के विषय में बोलेंगे । इसके लिए हमें अनुमति दो ।’’ मुख्यमंत्री की सभा का प्रचार हो चुका था । हमने भी सामाजिक प्रसारमाध्यमों मेें प्रचार किया । परिणाम स्वरूप कानून-व्यवस्था का प्रश्‍न उत्पन्न न हो; इसके लिए मुख्यमंत्री की सभा वहां से निरस्त की गई । तदुपरांत पक्ष ने मुझसे पूछा, ‘‘मुख्यमंत्री की सभा निरस्त करने का अधिकार आपको किसने दिया ?’’ हमने कहा, ‘‘वर्ष 1939 में रा.स्व. संघ के कार्यकर्ता की हत्या के आरोपी मुख्यमंत्री की सभा मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र में नहीं होने दूंगा ।’’

🚩2. अच्छा कार्य करने पर लोग ध्यान में रखते हैं । मुझे अनेक क्रांतिकारियों का स्मरण होता है । उन्होंने धर्म के लिए बहुत कार्य किये हैं । हम सब भाग्यवान हैं । हम अखंड #हिन्दू राष्ट्र के लिए लड़ रहे हैं । भगवान ने हमारे लिए यह कार्य लिखा है । हमें #छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे बनना है । उसके लिए संगठित होना चाहिए ।

🚩3. #तेलंगाना सरकार द्वारा किया जा रहा #धर्मांधों का तुष्टीकरण ! 
अभी #रमजान का महीना चल रहा है । तेलंगाना सरकार ने रमजान के लिए 8 करोड़ रुपए का अनुदान दिया है । #नमाज पढ़नेवालों को पानी के पैकेट देने के लिए सरकार ने #5 करोड़ रुपए दिए हैं । महानगरपालिकाआें को नमाज स्थल के गड्ढे भरने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए हैं । राज्य की #500 मस्जिदों में प्रत्येक को 2 लाख रुपए दिए हैं । प्रत्येक व्यक्ति को 5 किलो चावल और बिरयानी मसाला देने के लिए यह रकम दी है । राज्य में मुसलमानों को #12 प्रतिशत आरक्षण है । इतना आरक्षण और कहीं नहीं ।

🚩#श्री. टी.एन. मुरारी ने भी कहा कि तेलंगाना का तेलंगाना राष्ट्र समितीप्रणित शासन तथा सभी राजकीय पक्ष अल्पसंख्यकों का सर्वाधिक तुष्टीकरण कर रहे हैं । 

🚩आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में अल्पसंख्यकों के भरोसे पर शासन स्थापित किया जाता है । इसलिए वहां सभी पक्ष ‘इफ्तार’ भोज का आयोजन करते हैं । उनमें राजकीय नेताआें सहित प्रशासकीय अधिकारी भी सम्मिलित होते हैं; परंतु वही नेता और अधिकारी गणेशोत्सव के समय गणेशपूजन के लिए बुलाकर भी नहीं आते । 

🚩आगे कहा कि तेलंगाना में पहले 1 हजार तालाब थे । अब वहां केवल 12 तालाब रह गए हैं । उस स्थान पर देवताआें की मूर्तियां विसर्जित करने से रोका जाता है; क्योंकि उस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों ने अनेक मस्जिदें बनाई हैं । तेलंगाना राष्ट्र समिति का शासन अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के लिए बहुसंख्यकों का आरक्षण और सुविधाएं देनेका निरंतर प्रयत्न कर रहा है । उस क्षेत्र में चर्च और मस्जिद बनाने के लिए तहसील कार्यालय से तत्काल अनुमति दी जाती है ।

🚩#श्री. आनंद पाटील ने कहा कि, भारत  #‘रामराज्य’, सम्राट युधिष्ठिर का ‘धर्मराज्य’ और छत्रपति शिवाजी महाराज का #‘हिन्दवी स्वराज्य’, आदि आदर्श राजकीय व्यवस्थाआें की परंपरा है; परंतु वर्तमान में #राज्यव्यवस्था, #शिक्षा, #स्वास्थ्य, #पुलिस और अन्य सभी व्यवस्थाआें में  #भ्रष्टाचार बढ़ रहा है । कार्य और व्यवसाय करते समय इन दृष्पप्रवत्तियों के कारण अनेक बाधाआें का सामना करना पड़ता है । सामान्य व्यक्ति भी #अधर्माचरण, धर्मनिरपेक्षतावाद के कारण उस व्यवस्था का एक घटक बनता जा रहा है । ‘यह राष्ट्र मेरा है, यह मेरी मातृभूमि है और मैं समाज का एक घटक हूँ' इस दृष्टि से सामाजिक कर्तव्य के लिए इस #भ्रष्ट व्यवस्था के विरोध में खड़े रहकर वैध मार्ग से संघर्ष करना चाहिए ।

🚩अब देखते है इन #हिन्दुत्वनिष्ठों की #आवाज #सरकार सुनती है कि नही???

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