Tuesday, November 28, 2017

महिलाओं से सताए पुरुषों के लिए लड़ रही है 31 साल की दीपिका


November 28, 2017 https://wp.me/p6qNSS-G4

🚩देश में दामिनी कांड के बाद पुरुषों के लिए कठोर कानून बनाये गये हैं, लेकिन वास्तविकता में जो महिला पीड़ित है उसको न्याय नही मिल पाता है दूसरी ओर बदला लेने की भावना, संपत्ति हड़पने या सामने वालों को बदनाम करने के लिये कुछ महिलाएं कानून का धुरन्धर दुरुपयोग कर रही हैं और निर्दोष पुरुषों को झूठे केस में फंसा रही थी ।

🚩जब भी कोई महिला पुरूष के खिलाफ खड़ी होगी तो स्वाभाविक है कि अन्य महिलाएं भी उसी का ही पक्ष ले, लेकिन दीपिका ऐसा नही करके जो पुरुष निर्दोष हैं और उनके खिलाफ महिलाओं द्वारा झूठे केस हो रहे हैं, उनको न्याय दिलाने के लिए कार्य कर रही है। 
31-year-old Deepika is fighting for men suffering from women

🚩महिलाओं के खिलाफ बड़ी तादाद में होने वाले अपराध को देखते हुए देश में कई सामाजिक संस्थाएं, एनजीओ व कार्यकर्ता हैं, लेकिन यह भी देखा जाता है कि कानून का फायदा उठाकर कुछ महिलाएं पुरुषों को प्रताड़ित करती हैं ।

🚩ऐसे में एक महिला ऐसी भी है, जो पुरुषों के अधिकारों के लिए लंबे समय से आवाज उठा रही है। 31 साल की दीपिका नारायण भारद्वाज का कहना है कि औरतों के लिए लड़ने वाले तो बहुत हैं लेकिन कई पुरुष भी समाज में महिलाओं द्वारा शोषित हो रहे हैं, जिनके लिए कोई आवाज नहीं उठा रहा है।

🚩दीपिका नारायण दहेज प्रताड़ना कानून के तहत फंसाए गए पुरुषों को भी कानूनी मदद देती है।

🚩उनका कहना है कि धारा 498A (दहेज कानून) का कुछ महिलाओं द्वारा बेहद दुरुपयोग किया जाता है। इस काम के साथ-साथ दीपिका डाक्युमेंट्री फिल्म भी बनाती है। पत्रकार रह चुकी दीपिका ने 2012 में इस मुद्दे पर रिसर्च शुरू की थी।

🚩ऐसे हुई काम की शुरुआत

🚩2011 में उनके एक रिश्तेदार की शादी टूटी थी और उसकी बीवी ने उसके पूरे परिवार के खिलाफ दहेज का मामला दर्ज करा दिया था। उनके खिलाफ भी शिकायत की गई थी। तब उनके परिवार ने बड़ी रकम देकर इस मामले को खत्म किया, पर तभी से उनके मन में ये बात घर कर गई थी कि इस कानून के दुरुपयोग को रोकना है।

🚩कई दहेज प्रताड़ना के मामले झूठे

🚩दीपिका ने अपनी रिसर्च के दौरान पाया कि ज्यादातर दहेज प्रताड़ना के मामले झूठे हैं। झूठे आरोप में फंसाए जाने के कारण कुछ मामले में लड़के के मां बाप ने बदनामी के डर से आत्महत्या तक कर ली। उन्होंने इसी मुद्दे पर 'Martyrs of Marriage' नाम की डाक्युमेंट्री फिल्म बनाई है।

🚩कानून का किया विरोध

🚩2012 में हुए निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म रोकने के लिए भी संसद ने कठोर कानून बनाए। दीपिका ने इसका भी जमकर विरोध किया। उनका मानना है कि कई औरतों द्वारा इन कठोर कानूनों का दुरुपयोग किया जा रहा है और पुरुषों के बेवजह फंसाया जा रहा है। 

🚩बलात्कार के 90 प्रतिशत मामले झूठे होते हैं

🚩अभी हाल ही सितम्बर माह में प्रतापगढ़ जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने बताया कि दलालों द्वारा प्रतिवर्ष काफी संख्या में बालिकाओं तथा महिलाओं द्वारा दुष्कर्म के प्रकरण दर्ज कराए जाते हैंं। जिसमें अनुसंधान के बाद अभियुक्तों के विरूद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किए जाते हैं। न्यायालय में गवाही के दौरान 90 प्रतिशत मामलों में पीडि़ताएं मुकर जाती हैं। जिसमें खेत, सम्पत्ति व रास्ते की रंजिश, पारिवारिक अथवा अन्य कारणों से अथवा अभियुक्त को ब्लेकमेल कर रुपए ऐंठने के लिए झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी, ऐसी स्थिति बताती है। पीडि़ताएं न्यायालय में स्वयं के द्वारा दी गई रिपोर्ट का भी समर्थन नहीं करती हैं ।

🚩न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रकरण दर्ज करवाए जाने से बयान करवाए जाने तक सब कुछ पूर्व निर्धारित होकर न्यायिक प्रक्रिया का पूर्णत: दुरूपयोग किया जा रहा है।

🚩साधु-संतों पर झूठे आरोप लगाए जाते है

🚩दस साल से स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में रहने वाली साध्वी चिदर्पिता ने बी पी गौतम के नाम के व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिया उसके बाद शाहजहाँपुर की कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ रेप का आरोप लगाया और इतने गंदे गंदे आरोप लगाये कि यहाँ पर लिखने पर शर्म महसूस हो रही है, मीडिया ने भी स्वामी की खूब बदनामी की, लेकिन आठ महीने साध्वी अपने प्रेमी पति के साथ रही जब उससे झगड़ा हो गया तो फिर से आश्रम में रहने लगी और बोली कि मैंने दबाव में आकर उनके खिलाफ केस किया था ।

🚩गुजरात द्वारका के स्वामी #केशवानंदजी पर कुछ समय पूर्व एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया और न्यायालय ने 12 साल की सजा भी सुना दी लेकिन जब दूसरे जज की बदली हुई तब देखा कि ये मामला झूठा है, स्वामी जी को फंसाने के लिए झूठा मामला दर्ज किया गया है, तब स्वामी को न्यायालय ने 7 साल के बाद निर्दोष बरी किया ।

🚩ऐसे ही दक्षिण भारत के स्वामी #नित्यानन्द जी के ऊपर भी फर्जी सेक्स सीडी बनाकर रेप का आरोप लगाया गया और उनको जेल भेज दिया गया बाद में उनको हाईकोर्ट ने क्लीनचिट देकर बरी कर दिया ।

🚩ऐसे ही हाल ही में #शिवमोगा और बैंगलोर मठ के शंकराचार्य राघवेश्वर भारती स्वामीजी से एक #गायिका ने 3 करोड़ रुपये मांगे, नही देने पर 167 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया ।
उनको भी न्यायालय ने झूठा मामला देखकर शंकराचार्य जी को निर्दोष बरी कर दिया ।

🚩सुप्रसिद्ध हस्तियों को अपने जाल में #फँसाकर करोड़ों रूपये एठने का धंधा चल पड़ा है और नहीं देने पर उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें #जेल भेजने की कोशिश की जाती है।

🚩इसी प्रकार का मामला सामने  है हिन्दू धर्म गुरु आसारामजी बापू का, उनके केस में न्यायालय में अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा जी ने किये कई सनसनीखेज़ खुलासे ।

🚩- FIR करवाई गई घटना के 5 दिन बाद ।
🚩- रजिस्टर के कई पन्ने संदिग्घ तरीके से फाड़ें गए ।
🚩- FIR 2 दिन बाद न्यायालय में पेश की गई ।
🚩- अलग-अलग सर्टिफिकेट में पाई गई लड़की की अलग-अलग उम्र ।
🚩- FIR लिखते समय की गई वीडियो रिकॉर्डिंग गायब कर दी गई ।
🚩- FIR और FIR की कार्बन कॉपी में अंतर पाया गया ।
🚩- मेडिकल में नहीं मिला एक खरोंच का भी निशान ।

🚩क्या ये कहीं न कहीं बापू आसारामजी को फंसाने की साजिश नहीं..??


🚩लगातार #मीडिया द्वारा बापू आसारामजी की छवि को #धूमिल करने का प्रयास करना, सरकार द्वारा जमानत तक का विरोध करना और #न्यायालय का जमानत देने से इंकार करना इससे साफ साबित होता है कि यह मामला भी उपजाऊ और फर्जी है ।

🚩आज सुप्रसिद्ध हस्तियाँ और संतों को फंसाने में #महिला कानून का #अंधाधुन दुरूपयोग किया जा रहा है 

🚩छह जिला #अदालतों के रिकॉर्ड से ये बात सामने आई है कि बलात्कार के 70 फीसदी मामले अदालतों में साबित ही नहीं हो पाते हैं ।

🚩बलात्कार कानून की आड़ में महिलाएं आम नागरिक से लेकर सुप्रसिद्ध हस्तियों, संत-महापुरुषों को भी #ब्लैकमेल कर झूठे बलात्कार आरोप लगाकर जेल में डलवा रही हैं । कानून का दुरुपयोग करने पर वास्तविकता में जो महिला पीड़ित होती है उसको न्याय भी नही मिला पाता है ।

🚩बलात्कार निरोधक #कानूनों की खामियों को दूर करना होगा। तभी समाज के साथ न्याय हो पायेगा अन्यथा एक के बाद एक निर्दोष सजा भुगतने के लिए मजबूर होते रहेंगे ।

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