Sunday, May 7, 2017

लंदन व न्यूजीलैंड के शिक्षकों ने स्वीकारा, संस्कृत पढ़ने से बच्चे बनते हैं महान

लंदन व न्यूजीलैंड के शिक्षकों ने स्वीकारा, संस्कृत पढ़ने से बच्चे बनते हैं महान
7 मई 2017
sanskrit

‘देववाणी संस्कृत’ की महानता !

आज अपनी #मातृभूमि पर उपेक्षा का दंश झेल रही ‘संस्कृत’ विश्व में एक #सम्माननीय भाषा और सीखने के महत्वपूर्ण पड़ाव का दर्जा प्राप्त कर रही है। जहां भारत के सार्वजनिक #पाठशालाओं में फ्रेंच, जर्मन और अन्य विदेशी भाषा सीखने पर जोर दिया जा रहा है वहीं विश्व की बहुत सी पाठशालाएं, ‘संस्कृत’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहे हैं !

ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) : प्राचीन काल से ही संस्कृत भाषा भारत की सभ्यता और #संस्कृति का सबसे मुख्य भाग रही है। फिर भी आज हमारे देश में संस्कृत को पाठशाली शिक्षा में अनिवार्य करने की बात कहने पर इसका विरोध शुरू हो जाता है। हम भारतवासियों ने अपने देश की #गौरवमयी संस्कृत भाषा को महत्व नही दिया। आज हमारे देश के विद्यालयों में संस्कृत बहुत कम पढ़ाई और सिखाई जाती है। किंतु आज अपनी #मातृभूमि पर उपेक्षा का दंश झेल रही संस्कृत विश्व में एक सम्माननीय भाषा और सीखने के महत्वपूर्ण पड़ाव का दर्जा हासिल कर रही है। जहाँ भारत के तमाम पब्लिक पाठशालों में फ्रेंच, जर्मन और अन्य विदेशी भाषा सीखने पर जोर दिया जा रहा है वहीं #विश्व की बहुत सी पाठशालाएं संस्कृत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहे हैं।

न्यूजीलैंड की एक पाठशाला में संसार की विशेषतः भारत की इस महान भाषा को सम्मान मिल रहा है। #न्यूजीलैंड के इस पाठशाला में बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए संस्कृत पढाई जा रही है। फिकिनो नामक इस पाठशाला का कहना है कि, संस्कृत से बच्चों में सीखने की क्षमता बहुत बढ जाती है। न्यूजीलैंड के शहर #अॉकलैंड के माउंट इडेन क्षेत्र में स्थित इस पाठशाला में लड़के और लड़कियां दोनों को शिक्षा दी जाती है। 16 वर्ष तक की आयु तक यहाँ बच्चों को शिक्षा दी जाती है ।
इस पाठशाला का कहना है कि, इसकी पढ़ाई मानव मूल्यों, मानवता और आदर्शों पर आधारित है। अमेरिका के #हिंदू नेता राजन झेद ने पाठ्यक्रम में संस्कृत को सम्मिलित करने पर #फिकिनो की प्रशंसा की है। फिकिनो में अत्याधुनिक साउंड सिस्टम लगाया गया है। जिससे बच्चों को कुछ भी सीखने में आसानी रहती है। पाठशाला के #प्रिंसिपल पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि, 1997 में स्थापित इस पाठशाला में नए तरह के विषय रखे गए हैं। जैसे दिमाग के लिए भोजन, शरीर के लिए भोजन, अध्यात्म के लिए भोजन।

इस पाठशाला में अंग्रेजी, इतिहास, गणित और प्रकृति के विषयों की भी पढ़ाई कराई जाती है। पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि संस्कृत ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो #व्याकरण और उच्चारण के लिए सबसे श्रेष्ठ है। उनके अनुसार संस्कृत के जरिए बच्चों में अच्छी अंग्रेजी #सीखने का आधार मिल जाता है। संस्कृत से बच्चों में अच्छी अंग्रेजी #बोलने, समझने की क्षमता विकसित होती है।

पीटर क्राम्पटन कहते हैं कि, दुनियाँ की कोई भी भाषा सीखने के लिए #संस्कृत भाषा आधार का काम करती है। इस पाठशाला के बच्चे भी #संस्कृत पढकर बहुत खुश हैं। इस पाठशाला में दो चरणों में शिक्षा दी जाती है। पहले चरण में दस वर्ष की आयु तक के बच्चे और दूसरे चरण 16 वर्ष की आयु वाले बच्चों को शिक्षा दी जाती है। इस पाठशाला में बच्चों को दाखिला दिलाने वाले हर अभिभावक का यह #प्रश्न अवश्य होता है कि, आप संस्कृत क्यों पढ़ाते हैं? हम उन्हें बताते हैं कि यह भाषा श्रेष्ठ है। विश्व की महानतम रचनाएं इसी भाषा में लिखी गई हैं।

अमेरिका के #हिंदू नेता राजन झेद ने कहा है कि, संस्कृत को सही स्थान दिलाने की आवश्यकता है। एक ओर तो सम्पूर्ण विश्व में संस्कृत भाषा का महत्व बढ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत में संस्कृत भाषा के विस्तार हेतु ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं जिसके कारण भारत में ही संस्कृत का #विस्तार नहीं हो पा रहा है और संस्कृत भाषा के महत्व से लोग #अज्ञात हैं । हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध और जैन धर्म के तमाम ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं।

स्त्रोत : हिन्दू जन जागृति

संस्कृत भाषा की विशेषताएँ

(1) संस्कृत, विश्व की सबसे #पुरानी पुस्तक (वेद) की भाषा है। इसलिये इसे विश्व की प्रथम भाषा मानने में कहीं किसी संशय की संभावना नहीं है।

(2) इसकी सुस्पष्ट व्याकरण और वर्णमाला की #वैज्ञानिकता के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिद्ध है।

(3) सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्य की धनी होने से इसकी महत्ता भी #निर्विवाद है।

(4) इसे देवभाषा माना जाता है।

(5) संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि #संस्कारित भाषा भी है अतः इसका नाम संस्कृत है। 
केवल संस्कृत ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसका नामकरण उसके बोलने वालों के नाम पर नहीं किया गया है। संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि #पाणिनि, महर्षि #कात्यायन और योगशास्त्र के प्रणेता महर्षि #पतंजलि हैं। 
इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है।

(6) शब्द-रूप - विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक या कुछ ही रूप होते हैं, जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 27 रूप होते हैं।

(7) द्विवचन - सभी भाषाओं में एकवचन और बहुवचन होते हैं जबकि संस्कृत में #द्विवचन अतिरिक्त होता है।

(8) सन्धि - संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है सन्धि। संस्कृत में जब दो अक्षर निकट आते हैं तो वहाँ #सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है।

(9) इसे कम्प्यूटर और कृत्रिम #बुद्धि के लिये सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।

(10) शोध से ऐसा पाया गया है कि संस्कृत #पढ़ने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

(11) संस्कृत वाक्यों में शब्दों को किसी भी क्रम में रखा जा सकता है। इससे अर्थ का #अनर्थ होने की बहुत कम या कोई भी #सम्भावना नहीं होती। 
ऐसा इसलिये होता है क्योंकि सभी शब्द विभक्ति और वचन के अनुसार होते हैं और क्रम बदलने पर भी सही अर्थ सुरक्षित रहता है। जैसे - अहं गृहं गच्छामि या गच्छामि गृहं अहम् दोनो ही ठीक हैं।

(12) संस्कृत विश्व की सर्वाधिक 'पूर्ण' (perfect) एवं #तर्कसम्मत भाषा है।

(13) संस्कृत ही एक मात्र साधन है जो क्रमश: अंगुलियों एवं जीभ को #लचीला बनाते हैं। इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान एवं अन्य भाषाएँ ग्रहण करने में सहायता मिलती है।

(14) संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरन्तर होती आ रही है। इसके कई लाख ग्रन्थों के पठन-पाठन और #चिन्तन में भारतवर्ष के हजारों पुश्त तक के करोड़ों #सर्वोत्तम मस्तिष्क दिन-रात लगे रहे हैं और आज भी लगे हुए हैं।
 पता नहीं कि संसार के किसी देश में इतने काल तक, इतनी दूरी तक व्याप्त, इतने #उत्तम मस्तिष्क में विचरण करने वाली कोई भाषा है या नहीं। शायद नहीं है। दीर्घ कालखण्ड के बाद भी असंख्य प्राकृतिक तथा मानवीय #आपदाओं (वैदेशिक आक्रमणों) को झेलते हुए आज भी 3 करोड़ से अधिक संस्कृत #पाण्डुलिपियाँ विद्यमान हैं। यह संख्या ग्रीक और लैटिन की पाण्डुलिपियों की सम्मिलित संख्या से भी 100 गुना अधिक है। 
निःसंदेह ही यह सम्पदा छापाखाने के #आविष्कार के पहले किसी भी संस्कृति द्वारा सृजित सबसे बड़ी सांस्कृतिक विरासत है।

(15) संस्कृत केवल एक मात्र भाषा नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है। संस्कृत एक संस्कृति है एक #संस्कार है संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है, वसुधैव कुटुम्बकम् की #भावना है।


अब केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों को सभी स्कूलों, कॉलेजों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य करना चाहिए जिससे बच्चों की बुद्धिशक्ति का विकास के साथ साथ बच्चे सुसंस्कारी बने ।

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श्री राममंदिर निर्माण, गौहत्या बंदी, संतों की रिहाई के लिए होगा सत्याग्रह व विशाल धरना

श्री राममंदिर निर्माण, गौहत्या बंदी, संतों की रिहाई के लिए होगा सत्याग्रह व विशाल धरना

6 मई 2017

हिन्दू-मुस्लिम एकता मंच द्वारा हिन्दू एवं मुस्लिम #धर्मगुरुओं द्वारा गौहत्या को शीघ्र रोने, अयोध्या में शीघ्रता से भगवान श्री राम #मंदिर का निर्माण करने के लिए और अभी जो भी #निर्दोष हिन्दू साधु-संत बिना सबूत जेल में हैं उनकी जल्दी रिहाई के लिए दिल्ली #जंतर-मंतर में विशाल #सत्याग्रह एवं धरना दिया जायेगा ।

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हिन्दू-मुस्लिम एकता मंच ने दैवी और दानवी #शक्तियों  के वैश्विक  #युद्ध के  बीच  एक दैवी  चेतावनी देते हुए कहा है कि #संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए  प्रसिद्ध #धर्मगुरुओं और महात्माओं के द्वारा कई बार संयुक्त राष्ट्र संघ के #राष्ट्राध्यक्षों को चेतावनी पत्र दिया गया, परंतु वे असली मुद्दे छुपाकर जनता को #गुमराह कर रहे हैं I 

आज विश्व मानवता दुख और अशांति की #आग में जल रही है I धर्मनिष्ठ #ईमानदार जनता का शोषण करने के लिए धर्मविमुख, स्वार्थी, अपराधी, अधर्मी ,आसुरी शक्तियाँ एकजुट हैं I 
इस अन्याय #अत्याचार के कारण लाखों लोग आत्महत्या के शिकार हो गए हैं , करोड़ों परिवार आर्थिक संकट से ग्रस्त हैं ।

धर्म के बिना राजनीति #राक्षस नीति है इसलिए  #महाभारत युद्ध हुआI धर्म के बिना शान्ति #असंभव है I आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक ऐसे #कानून बनाए गए हैं जिससे समाज टूट रहा है I अपराध , अश्लीलता की बाढ़ आई हुई है I 

इतिहास और शिक्षा को #विकृत करके पढ़ाया जा रहा है I अनेक प्रकार के #आतंकवादी पैदा हो गए हैं I सद्दाम हुसैन, कर्नल गद्दाफी, अलबशर ,अफगानिस्तान की बची हुई #सेना कुछ भी करने को तैयार है I 

भारत की सीमा के अंदर #राजनीतिक संरक्षण में माओवाद, नक्सलवाद जैसे #आतंकवाद पनप रहे हैं I विश्व की लगभग 90% संपत्ति पर 4 % लोगों का अधिकार है I मार्गदर्शन के अभाव में #अनुचित खानपान रहन सहन के कारण जनता #पर्यावरण और स्वयं की शत्रु बन गई है I 

धर्मविमुख NGO व्यवसायिक #कंपनियों के द्वारा राजनीति ,प्रचार तंत्र ,और #न्यायालय प्रभावित है।

वैश्विक समस्याओं के समाधान में विश्व के #वैज्ञानिक भारत के संतों की #ओरा (AURA) की दिव्य क्षमताओं से #आश्चर्यचकित है I लेकिन उनकी ओर कोई ध्यान नही दे रहा है ।

विदेशों में बुरा हाल है विश्व स्वास्थ्य #संगठन WHO यूनिसेफ की सन् 2012 की रिपोर्ट के अनुसार किशोरियों के कम उम्र में #गर्भधारण और बच्चों के #जन्म देने से प्रतिवर्ष 50,000 किशोरियों की #मौत हो जाती हैI अमेरिका में TAX दाताओं को सन् 2010 में किशोरियों के गर्भधारण और प्रसव के कारण #स्वास्थ सम्बन्धी देखभाल पर 630 अरब रूपये की #कीमत चुकानी पड़ी I 

धर्मविमुख वैश्विक #महाशक्तियाँ आपसी वर्चस्व और हथियारों के व्यवसाय की #अंतरराष्ट्रीय राजनीति  कर रही है, विश्व मानवता के लिए यह #दुर्भाग्यपूर्ण है I 

भारतीय संस्कृति  को समाप्त करने के लिए अन्तरराष्ट्रीय #षड़्यंत्र किये जा रहे हैं ।अंतरराष्ट्रीय #राजनीतिक षड़्यंत्र के तहत भारत के विश्व प्रसिद्ध मार्गदर्शक #संतो को जेल  में डालकर प्रताड़ित  किया जा रहा है जैसे अभी भारत के 81 वर्ष के संत आशाराम जी बापू ( Sant Asharam ji Bapu ) ने विश्व में हिन्दू #संस्कृति का डंका बजाया, #धर्मान्तरण पर रोक लगाई और विदेशी #कम्पनियों से लोहा लेने के कारण आज वे जेल Jail में हैं, सम्पूर्ण #विश्व मानवता के लिए यह अभिशाप है I 

भारत के #विश्व प्रसिद्ध संत आशारामजी बापू  की #रिहाई  के लिए तथा फंसाये गए अन्य निर्दोष #हिन्दू साधु-संतो की रिहाई के लिए तथा अयोध्या राम मंदिर निर्माण एवं गौहत्या बंदी के लिए हिंदू - मुस्लिम #धर्मगुरु एक दिवसीय सत्याग्रह धरना आयोजित कर रहे हैं I 


सत्याग्रह - 7 मई 2017 से शाम 7:00 बजे से 8 मई 2017 तक अन्न #जल का त्याग किया जाएगा I

धरना - 8 मई 2017 को प्रातः 10:00 से 2:00 बजे तक हिंदू - मुस्लिम धर्मगुरुओं का संबोधन होगाI ,स्थान- जंतर मंतर (नई दिल्ली
)


इस सत्याग्रह में आप सभी की उपस्थिति #प्रार्थनीय है I


सत्याग्रह और धरना के बाद शीघ्रता से श्री #राममंदिर का निर्माण, गौहत्या पर रोक ,हिन्दू संतों की रिहाई  करने के लिए एक #पत्र लिखा जाएगा उस पत्र को सभी देशों  के सभी पंथो के #प्रसिद्ध धर्म  गुरुओं,  संतो ,महात्माओं , गणमान्य  व्यक्तियों एवं  भारत  में स्थित सभी देशों के राजदूतों को प्रेषित किया जायेगा I 

UNO कार्यालय, मानवाधिकार आयोग, भारत के राष्ट्रपति  ,प्रधानमंत्री को #ज्ञापन दिया जाएगा I


निवेदक:  डॉ. गंगा राम तिवारी , राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदू - मुस्लिम एकता मंच 
मो.-9415250869

अब देखते हैं कि हिंदू - मुस्लिम एकता मंच की #आवाज कहाँ तक पहुँचती है और सरकार इस पर जल्दी से कोई #कार्यवाही करती है या फिर इस आन्दोलन को और तेजी से बढ़ाना होगा?


गौरतलब है कि कई #संगठन श्री राम मंदिर निर्माण, गौहत्या पर रोक एवं हिन्दू साधु-संतों की #रिहाई के लिए अनेक बार #सत्याग्रह के साथ साथ धरने कर चुके हैं और #सोशल मीडिया पर भी आवाज उठाई है लेकिन अभी तक उस पर कोई #ठोस कार्यवाही नही हुई है ।

अब देखते हैं कि हिंदू - मुस्लिम एकता मंच के #सत्याग्रह व धरने के बाद सरकार द्वारा कोई ठोस #कार्यवाही होती है कि नही..???

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Friday, May 5, 2017

इंटरनेट पर अंग्रेजी भाषा को पछाड़कर राज करेगी हिंदी भाषा

इंटरनेट पर अंग्रेजी भाषा को पछाड़कर राज करेगी हिंदी भाषा

5 मई 2017

आज के युग मे लोग इंटरनेट का उपयोग अधिक से अधिक करने लगे हैं, भारत में इंटरनेट पर सर्च अधिक हिन्दी भाषा और अन्य भारतीय भाषाओं में करने लगे हैं । भारतीय जनता ने जितनी तेजी से राष्ट्रभाषा हिन्दी में नेट पर सर्च करना चालू कर दिया इससे तो पता चलता है कि विश्व में हिन्दी भाषा का प्रयोग होने लगेगा ।
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भारतीय भाषाओं के इंटरनेट यूजर्स के लिए खुशखबरी आई है ।

वर्ष 2021 तक इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं का राज होगा । हिंदी, बांग्ला, मराठी, तमिल और तेलुगु आदि #भारतीय भाषाओं के यूजर्स तेजी से बढ़ेंगे और अंग्रेजी के दबदबे को #खत्म कर देंगे । 

आपको बता दें कि #गूगल और #केपीएमजी की एक संयुक्त रिपोर्ट में यह अनुमान व्यक्त किया गया है । रिपोर्ट में बताया गया है कि #वर्ष 2021 तक इंटरनेट पर तकरीबन 536 मिलियन (53.6 करोड़) यूजर्स #भारतीय भाषाओं के होंगे, जो कि कुल इंगलिश यूजर्स 199 मिलियन (1.99 करोड़) ही होंगे मतलब भारतीय #भाषाओं में 2.5 गुना ज्यादा होगा । 


रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल इंटरनेट यूजर्स में से 75 प्रतिशत यूजर्स #भारतीय भाषाओं के होंगे । माना जाता है कि #भारतीय भाषाओं के अधिकांश यूजर्स #मोबाइल से #इंटरनेट का उपयोग करते हैं । वहीं, भारत के इंटरनेट यूजर्स में से 78 प्रतिशत #मोबाइल पर इंटरनेट का उपयोग करते हैं ।

पांच सालों में भारतीय #भाषाओं के यूजर्स की संख्या में 450 प्रतिशत की #वृद्धि हुई है । वर्ष 2011 में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 42 मिलियन (4.2 करोड़) थी, जो अब 234 मिलियन (23.4 करोड़) हो गयी है । वर्ष 2021 तक इसके 536 मिलियन (53.6 करोड़) तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। इसी तेजी को देखते हुए आगामी चार साल में #भारतीय भाषाओं के कुल इंटरनेट #यूजर्स में से एक तिहाई सिर्फ हिंदी में इंटरनेट यूज कर रहे होंगे । 

बाकी रिपोर्ट्स के अनुसार, 201 मिलियन (20.1 करोड़) हिंदी के यूजर्स, 51 मिलियन (5.1 करोड़) मराठी के और 42 मिलियन (4.2 करोड़) बांग्ला भाषा के #यूजर होंगे । 

भारत में #डिजिटल न्यूज का असर भी तेजी से बढ़ रहा है । 

भारत में सोशल मीडिया पर भी 21 फीसदी की #वृद्धि दर्शाता है । 


आपको बता दें कि जापान के लोग किसी भी देश में जाते हैं तो अपनी #राष्ट्रभाषा का ही प्रयोग करते हैं लेकिन हमको सालों से #अंग्रेजों ने गुलाम बनाकर रखा था इसलिए आज भी वही #गुलामी के संस्कार घुसे हैं और हम राष्ट्रभाषा नही बल्कि अंग्रेजी भाषा बोलकर अपने को #गौरान्वित  मानते हैं ।क्योंकि आजादी के 70 साल के बाद भी हमारे गुलामी के संस्कार जा नही रहे हैं ।

अंग्रेज या अमेरिकन हमारे देश में आते हैं तो उनकी भाषा #अंग्रेजी का ही प्रयोग करते है वो #हिन्दी नही बोलते हैं और नही सीखने की कोशिश करते हैं तो हम क्यों गुलाम बनाने वालों की भाषा का प्रयोग करें???

अभी हम कहीं पर भी जायें तो #राष्ट्रभाषा का ही प्रयोग करें, इंटरनेट पर भी सर्च #हिन्दी में ही करे जिससे हमारी भाषा का उनको भी महत्व समझ में आये और वे हमारे अनुसार चले नहीं के हम उनके अनुसार ।

हमारी भारतीय संस्कृति सनातन संस्कृति है , बाकि धर्म, महजब बाद में आये और हमारी #मूल भाषा देवताओं की भाषा #संस्कृत भाषा थी लेकिन समय बदलते ही #संस्कृत भाषा से बनी हिन्दी भाषा का ही प्रयोग करें और दुनियाँ को बता दें कि हमारी भारतीय #संस्कृति और हमारी भाषा #विश्व में सर्वश्रेष्ठ है ।

आपको बता दें कि दुनिया में हिंदी बोलने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2005 में #दुनियाँ के 160 #देशों में हिंदी बोलने वालों की अनुमानित #संख्या 1,10,29,96,447 थी। उस समय चीन की मंदारिन भाषा बोलने वालों की संख्या इससे कुछ अधिक थी। लेकिन 2015 में दुनिया के 206 देशों में करीब 1,30,00,00,000 (एक अरब तीस करोड़) लोग हिंदी बोल रहे हैं और अब #हिंदी बोलने वालों की संख्या #दुनियाँ में सबसे ज्यादा हो चुकी है।

अभी तो चीन के 20 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। 2020 तक वहाँ हिंदी पढ़ाने वाले #विश्वविद्यालयों की संख्या 50 से अधिक पहुँच जाने की उम्मीद है। यहॉ तक कि चीन ने अपने 10 लाख सैनिकों को भी हिंदी सिखा रखी है। 


भारत के अलावा मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, गयाना, ट्रिनिडाड और टोबैगो आदि देशों में हिंदी #बहुप्रयुक्त भाषा है। भारत के बाहर फिजी ऐसा देश है,जहाँ हिंदी को #राजभाषा का दर्जा प्राप्त है।

हिंदी को वहाँ की #संसद में प्रयुक्त करने की मान्यता प्राप्त है। मॉरीशस में तो बाकायदा "विश्व हिंदी सचिवालय" की स्थापना हुई है ।


शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने अपनी सिफारिशों में #सरकारी और निजी दोनों संस्थानों में से धीरे-धीरे अंग्रेजी को हटाने और #भारतीय भाषाओं को शिक्षा के सभी स्तरों पर शामिल करने पर जोर दिया है। साथ ही आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी जैसे अंग्रेजी भाषाओं में पढ़ाई कराने वाले संस्थानों में भी #भारतीय भाषाओं में शिक्षा देने की सुविधा देने पर जोर दिया गया है। 


हिंदी भाषा इसलिये दुनियाँ में प्रिय बन रही है क्योंकि #इस भाषा को देवभाषा #संस्कृत से लिया गया है जिसमें मूल शब्दों की संख्या 2,50,000 से भी अधिक है। जबकि अंग्रेजी भाषा के मूल शब्द केवल 10,000 ही है ।


हिंदी का शब्दकोष बहुत #विशाल है और एक-एक भाव को व्यक्त करने के लिए सैकड़ों शब्द हैं जो अंग्रेजी एवं अन्य भाषाओं में नही हैं। #हिंदी भाषा संसार की उन्नत भाषाओं में सबसे अधिक व्यवस्थित #भाषा है। 


आज मैकाले की वजह से ही हमने मानसिक #गुलामी बना ली है कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम चल नहीं सकता । लेकिन आज दुनियाँ में #हिंदी भाषा का महत्व जितना बढ़ रहा है उसको देखकर समझकर हमें भी हिंदी भाषा का उपयोग अवश्य करना चाहिए ।


अपनी मातृभाषा की गरिमा को पहचानें । #अपने बच्चों को अंग्रेजी (कन्वेंट स्कूलो) में शिक्षा दिलाकर उनके विकास को #अवरुद्ध न करें । उन्हें मातृभाषा (गुरुकुलों) में पढ़ने की स्वतंत्रता देकर उनके #चहुँमुखी विकास में सहभागी बनें ।

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Thursday, May 4, 2017

अमेरिकन इतिहास में पहली बार भारतीय हिन्दू संत की धूम

अमेरिकन इतिहास में पहली बार भारतीय हिन्दू संत की धूम..

कैलिफोर्निया:- सैन जोस जिला शिक्षा विभाग (बेरीएस्सा यूनियन स्कूल डिस्ट्रिक्ट) #कैलिफोर्निया ने इस वर्ष हिन्दू संत आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित तथा श्री योग वेदान्त सेवा समिति द्वारा आयोजित “मातृ-पितृ पूजन दिवस” के प्रचार की ना केवल अनुमति दी बल्कि इसके प्रचार पर अधिकारिक मोहर भी लगाई।

प्रधान टाइम मीडिया प्रभारी #नीलू अरोड़ा ने जानकारी देते हुये बताया कि शिक्षकों के सहयोग से हिन्दू संत आसारामजी बापू के श्री चित्र वाला “#मातृ-पितृ पूजन दिवस” का पोस्टर जिले के 11 से अधिक विद्यालयों के हजारों अमेरिकन बच्चों तथा अभिभावकों तक पहुँचा। 
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स्वयं प्राचार्यों ने अभिभावकों को पोस्टर सहित ईमेल भेजे। #विद्यालयों के #नोटिस बोर्ड तथा कक्षाओं में भी बच्चों को कार्यक्रम के बारे में बताया गया व घर ले जाने के लिए फ्लायर भी दिये गये। इसके अतिरिक्त सैन #जोस लाइब्रेरी के कर्मचारियों ने भी लाइब्रेरी के बाहर तथा वेबसाइट पर “मातृ-पितृ पूजन दिवस” का पोस्टर लगाकर इसका प्रचार किया। 

पब्लिक लाइब्रेरी की #वेबसाइट पर इवेंट का लिंक:

सिएरामोंट मिडल स्कूल के प्राचार्य द्वारा शिक्षा विभाग से अनुमोदन की #स्टैम्पवाला पोस्टर व ईमेल 1200 बच्चों के अभिभावकों को भेजा गया।
साथ ही लेनव्यू #एलीमेंट्री स्कूल के हर बच्चे को “मातृ-पितृ पूजन दिवस”  का फ्लायर दिया गया।

इस स्कूल में बच्चों की संख्या 600 है। कई अन्य स्कूलों में जैसे रस्किन एलीमेंट्री स्कूल, मोर्रील्ल मिडल स्कूल, मेजेस्टिक वे एलीमेंट्री स्कूल, विंन्सी #एलीमेंट्री स्कूल, नोबल एलीमेंट्री स्कूल, टोयोन #एलीमेंट्री स्कूल में भी “#मातृ-पितृ पूजन दिवस” के कार्यक्रम की जानकारी स्कूल द्वारा पोस्टर लगा कर, शिक्षकों द्वारा बच्चों को बताकर तथा फ्लायर बांटकर दी गयी। पीडमोंट #हाईस्कूल में भी पोस्टर दिए गये जबकि यह स्कूल दूसरे जिले में आता है फिर भी उन्होंने आपत्ति नहीं की।

उल्लेखनीय है कि भारत के विभिन्न स्कूलों में भी जनवरी-फरवरी-मार्च-अप्रैल माह से “मातृ-पितृ पूजन दिवस” #कार्यक्रम मनाया जाता रहा है जिसमें सभी धर्मों के #माता-पिता व बच्चे सम्मिलित होते रहे हैं।  इस पर्व से माता-पिता तथा बच्चों के बीच की दूरियाँ खत्म हुई हैं और सभी बच्चों व माता-पिताओं की यह हार्दिक इच्छा रही कि हर साल इसी तरह से स्कूलों में यह दिवस मनाया जाता रहे ताकि इन सुसंस्कारों से भारत अपने प्राचीन गौरव को पुन: प्राप्त कर सके।

गौरतलब है कि हिन्दू संत #आसारामजी बापू ने 2006 से 14 फरवरी #वेलेंटाइन डे की जगह "मातृ-पितृ पूजन" शुरू किया था तबसे लेकर आज तक करोड़ो #विद्यार्थी इस दिन माता-पिता का पूजन करते हैं और माता-पिता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं ।

हिन्दू संत आसारामजी बापू जेल जाने के पीछे का कारण?

जबसे हिन्दू संत #आसारामजी बापू ने मातृ-पितृ पूजन शुरू किया है तबसे विदेशी कम्पनियों को अरबो-खरबों का लॉस हो रहा था क्योंकि उनके बड़े-बड़े गिफ्ट,गर्भ निरोधक सामग्री, #दवाइयां एवं #चॉकलेट आदि सामग्री बिकना बन्द हो गई थी।

आपको बता दें कि संत आसारामजी बापू के प्रवचन करीब 200 देशों में लोग सुनते थे,जिसमें वे उत्तम #स्वास्थ्य के लिए ध्यान, #प्राणयाम,योग और घरेलू उपचार करने के सरल उपाय बताते थे और साथ-साथ में अंग्रेजी दवाइयों के साइड इफेक्ट भी बताते थे जिससे करोड़ो लोग अंग्रेजी #दवाइयां छोड़कर उनके बताए उपायों से ठीक होने लगे थे ।

दूसरा कार्य - उन्होंने करोड़ो लोगों को #व्यसन मुक्त कराया । बीड़ी, सिगरेट, दारू बनाने वाली कंपनियों को अरबो का लॉस हुआ ।

तीसरा कार्य - उन्होंने युवाओं को #ब्रह्मचर्य का पाठ पढ़ाया,संयमी और सदाचारी जीवन जीने की शिक्षा दी। जिससे युवाओं ने फिल्म देखना, क्लबों में जाना बंद कर दिया । सेक्स सामग्री बनाने वाली कंपनियों व बॉलिवुड और क्लबो आदि को कई करोड़ों का नुकसान होने लगा ।

चौथा कार्य - उन्होंने देश भर में हजारों #बाल संस्कार के साथ साथ #गुरुकुल शिक्षा पद्धति शुरू करवाई । जिससे बचपन से ही बच्चों में #नैतिकता के संस्कार पनपने लगे । इस समय में भी उनके आश्रम द्वारा 17 हजार से ज्यादा बाल संस्कार केन्द्र और सैकड़ों #गुरुकुल चल रहे हैं । इससे ईसाईयों द्वारा संचालित कान्वेंट स्कूलों पर गहरा प्रभाव पड़ा ।

पांचवा कार्य - उन्होंने गांव-गांव जाकर हिंदुत्व का प्रचार किया और #आदिवासी इलाकों में जाकर मकान बनवाये, #भजन करो भोजन पाओ,दक्षिणा पाओ जैसी अनेकों योजनाओं द्वारा लाखों हिंदुओं की #घरवापसी कराई जिससे धर्मान्तरण वालों के लिए संत आसारामजी बापू बाधक बनें।

बापू आसारामजी के 8 करोड़ से अधिक भक्तों संयम सदाचार रहने और #व्यशन छोड़ने पर इन सबसे विदेशी कंपनियों को करोड़ों अरबों का नुकसान होने लगा और #ईसाई #मिशनरियों के धर्मान्तरण कार्य में आँख की किकरी बन खड़े हुए संत आसारामजी बापू । 

तो शुरू हुआ 2007 से #संत आसारामजी बापू के विरुद्ध षड़यंत्र जिसमें पूर्व सरकार का भी रहा बड़ा हाथ। जो वेटिकन सिटी के इशारे पर सोनिया गांधी ने काम किया ।

पर जब किसी #षड़यंत्र में षड्यंत्रकारी सफल नहीं हुए तो एक लड़की को मोहरा बना एक घिनौने #षड़यंत्र में फंसाया गया निर्दोष #संत को और उनकी छवि धूमिल करने का काम किया विदेशी फण्ड से चलने वाली भारतीय मीडिया ने ।

जग जाहिर है कि आज तक उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं मिल पाया है पर उनको #फंसाने के #सैकड़ों प्रमाण मिल चुके हैं । पर हमारे देश का कानून जो आतंकवादी के साथ भी उदारता का व्यवहार रखता है जो बड़े से बड़े दोषी को भी जमानत और पेरोल देता है वो 81 वर्षीय संत को उनके #मौलिक अधिकार जमानत तक से क्यों वंचित रखे हुए है ?

विचार कीजिये !!


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Wednesday, May 3, 2017

लिंग भेद कानून हटाओ, पुरुषों को तबाही से बचाओ

 *महिलाओं के बढ़ते अपराध को लेकर पुरुष आयोग व मंत्रालय बनाने की उठी तीव्र माँग*

लिंग भेद कानून मिटाओ, पुरुषों को #तबाही से बचाओ...
पुरुष आयोग

महिलाओं के लिए बने विभिन्न #कानूनों में खास कर 498, 376 के दुरुपयोग से परेशान पुरुषों ने पुरुष #मंत्रालय और पुरुष आयोग की #मांग शुरू कर दी है ।

इस मांग को लेकर देश में 40 संगठनों समेत देश के दूसरे #परेशान पुरुषों ने #जंतर-मंतर पर शनिवार को प्रदर्शन किया है । ये #प्रदर्शन सिर्फ 'सैफ इंडिया और सैफ फैमिली के फाउंडेशन" की अपील पर किया जा रहा है । शनिवार को 'सैफ फैमिली ऑर्गेनिज़ीशन" की ओर से चलाई जा रही इस #मूमेंट में महिलाएँ भी शामिल थी जो उन महिलाओं के खिलाफ सड़क पर उतरी थी जो महिलाएँ कानून का दुरुपयोग कर पूरे परिवार को बर्बाद कर देती है ।

पुरुषों की ये डिमांड है कि एक पुरुष आयोग बने #मैन कमीशन वेल्फेर मैन भी उतना ही जरूरी है जितना कि #वीमेन वेल्फेर जरूरी होता है |

3 मई 2017
देखिये वीडियो
प्रदर्शनकारी महिला ने कहा कि #पेड़-पौधों के लिए यहाँ पर बहुत सारे आयोग हैं । महिलाओं के लिए #आयोग हैं, बच्चों के लिए आयोग हैं,रसायन के लिए आयोग हैं पर #पुरुषों के लिए कोई आयोग नहीं ।

 तो एक पुरुष आयोग बने और Rape In law 498 है  scrap 498 है ये जो ऐसा कानून है, बहुत सारी #फेमिलिस को तबाह कर रहा है । बर्बाद कर रहा है । जिसकी वजह से मैन #सुसाइट्स इतने बढ़ गए हैं कि हर साल 94000 पुरुष आत्म हत्याऐं कर रहे हैं ।

आंदोलन में आये #पुरुषों का कहना था कि आज #संविधान में 48 कानून महिलाओं के हित के लिए बनाए गए हैं फिर भी महिलाओं को बेचारी #अबला कहा जाता है । पुरुषों के लिए कानून नहीं है । #कुत्ते-बिल्लियों के लिए कानून है, पेड़-पौधों के लिए कानून है ।

अब देखना है कि क्या #सरकार पुरुषों के लिए कोई कानून लाती है ? या ऐसी #असमानता के कारण इन लोगों का आंदोलन और तेज होगा ?


महिलाओं के खिलाफ इतने #अपराध होते हैं कि उन्हें हमेशा #पीड़िता की नजर से ही देखा जाता है।  जबकि #हकीकत कुछ और ही है। 

शीना बोरा मर्डर #केस केवल एक मात्र ऐसा केस नहीं है जहां एक महिला #मर्डर के रूप में नजर आई। यह एक छिपी हुई #हकीकत है कि महिलाएं भी #हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने में #माहिर हैं और उनकी संख्या दिन व दिन बढ़ रही है। आज जब #महिलाएं शिक्षा, कैरियर और समाजिक कानूनों से मजबूत हो गई हैं तो वह पुरुषों की ही तरह संगीन #अपराध कर रही हैं। महिलाओं के लिए बचना थोड़ा आसान भी है क्योंकि उन्हें जल्दी संदिग्ध के तौर पर नहीं देखा जाता है।

एनसीआरबी की #रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश भर में 1,94,867 महिलाओं को मर्डर, किडनैपिंग, लूटपाट जैसे संगीन #अपराधों में गिरफ्तार किया गया।

भारत के 5 राज्यों में महिला अपराधियों की संख्या सबसे ज्यादा है ।

महाराष्ट्र:
महाराष्ट्र में 2014 में 30,568 महिलाओं को #गिरफ्तार किया गया है। इस राज्य में सबसे ज्यादा महिला अपराधी हैं।

उत्तर प्रदेश:
यहां अपराध के अलग-अलग मामलों में 17,437 #महिलाओं को गिरफ्तार किया गया।

राजस्थान:
 राजस्थान में 16, 187 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है।

गुजरात:
इस राज्य की 14,152 महिलाओं को साल 2014 में #अरेस्ट किया गया है।

पश्चिम बंगाल:
यहां गिरफ्तार महिलाओं की संख्या 12,181 है और यह लिस्ट में #पाँचवें नंबर पर है।

यह तो महिलाएं जो अपराध करती हैं उसकी बात हुई लेकिन कुछ #स्वार्थी महिलाएं दहेज एवं बलात्कार के झूठे केस लगाकर निर्दोष पुरूषों की जिंदगी खराब कर देती हैं ।

दिल्ली में बीते छह महीनों में 45 फीसदी ऐसे मामले अदालत में आये जिनमें #महिलाएँ हकीकत में #पीड़िता नहीं थी, बल्कि छोटी-छोटी बातों पर #गुस्सा होने या फिर पुरुषों द्वारा माँगें पूरी न होने पर #बलात्कार का केस दर्ज कराया गया था । द्वारका अदालत ने ऐसे बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है और साथ ही पुलिस से कहा कि वह निष्पक्ष रूप से मामले की जाँच करने के बाद ही #मुकद्दमा दर्ज करे।

दिल्ली महिला कमीशन के #आँकड़ों के अनुसार इनमें से 53.2% मामले झूठे हैं ।

अप्रैल 2013 से जुलाई 2014 के बीच #दिल्ली में रेप के 2753 मामले दर्ज हुए जिनमें से 1464 मामले #झूठे थे । 

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2013 के बीच आईपीसी की धारा 498A का दुरूपयोग करते हुए, पुरुषों पर 31,292 #झूठे मामले दर्ज हुए हैं । इनमें #वैवाहिक हिंसा और रेप के आरोप शामिल हैं । #छानबीन करने पर पता चला है कि महिला ने #प्रतिशोध लेने के लिए झूठा केस किया था ।

छह जिला अदालतों के #रिकॉर्ड से ये बात सामने आई है कि #बलात्कार के 70 फीसदी मामले अदालतों में #साबित ही नहीं हो पाते हैं । 

अब ये सोचिये, जिस #पुरुष पर झूठा केस किया जाता है, उसका जीवन कितना #अस्त-व्यस्त हो जाता होगा, समाज में अपमानित होने से ले कर #काम-रोजगार पर कितना असर होता होगा ? यह तो #भुक्तभोगी सदस्य व उसका परिवार ही समझ सकता है । एक बार ऐसा आरोप आप पर लग जाये तो चाहे आप #दोषमुक्त भी क्यों न हो जाएँ, समाज #सिर्फ आप पर लगे आरोप को #याद रखेगा । 

पॉक्सो, #बलात्कार व दहेज निरोधक #कानूनों की खामियों को दूर करना होगा तभी समाज के साथ #न्याय हो पायेगा अन्यथा एक के बाद एक #निर्दोष सजा भुगतने के लिए मजबूर होते रहेंगे । इसमें पुरुषों के साथ संबंधित बेशुमार #महिलाएँ व बच्चे और रिश्ते-नातेदार भी पीड़ित हो रहे हैं । अतः #बच्चों-महिलाओं की सुरक्षा तथा #राष्ट्रहित में कार्यरत संस्थाएँ और जागरूक जनता सजग हो और इन कानूनों में आवश्यक #संशोधन की माँग हो ।

केवल कानून और #डंडे के जोर से सच्चा सुधार नहीं हो सकता । सच्चे और स्थायी #सुधार के लिए, बलात्कार जैसे नृशंस अपराधों को रोकने के लिए #संयम-शिक्षा पर बल देने की आवश्यकता है ।सिनेमा, अश्लील साहित्य, समाचार पत्र-पत्रिकाओं, अश्लील वेबसाइटों एवं #इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर संयम लाना पड़ेगा ।  

इसके लिए #संयम-शिक्षा तथा सच्चे, सात्विक मूल्यों को पुन:स्थापित करना होगा । जो संत-#महापुरुष इस कार्य को देश में कर रहे थे उनपर ही #षड्यंत्रकारियों ने झूठा आरोप लगवाकर जेल में बंद करवा दिया ।

इससे पता चलता है कुछ स्वार्थी #राष्ट्र-विरोधी ताकतें कानून की आड़ लेकर #भारतीय #संस्कृति को नष्ट करने की बुरी मंशा रखती हैं । #संत-महापुरुष ही समाज के प्रहरी हैं, हमें उन पर हो रहे इस आघात को रोकना होगा । तभी जनता में #सुसंस्कार आयेगा और पुरुष महिलाओं की इज्जत करेगा बड़ी महिलाओं को अपनी माँ बहन समान सम्मान  और छोटी को बेटी की दर्जा देगा और महिलायें भी #अपराध करना, पुरुषों पर झूठे आरोप लगाना बन्द करेगी और फिर से भारत #विश्वगुरु पद पर आसीन होगा ।

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Tuesday, May 2, 2017

"गुजरात समाचार" न्यूज पेपर का लोग कर रहे बहिष्कार, बोले पाकिस्तानी पेपर है

*"गुजरात समाचार" न्यूज पेपर का लोग कर रहे बहिष्कार, बोले पाकिस्तानी पेपर है...*
2 मई 2017

सुकमा में हमारे देश के #जवानों पर जो हुआ उससे पूरे भारत की जनता #दुःखी हुई लेकिन 
कुछ लोग हिंदुस्तान का ही #अन्न खाकर पाकिस्तान का गुणगान गाने वाले भी हैं जो #खुशियाँ मना रहे हैं ।
गुजरात समाचार

अहमदाबाद से प्रकाशित #न्यूज पेपर "गुजरात समाचार" ने मुख्य पेज पर सबसे ऊपर बड़ा #हेडिंग छापा था कि " छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने 26 जवानों को फूंकी मार्या" अर्थात नक्सलियों ने हमारे 26 जवानों को फूंक (जला) दिया ।

इस तरह की भाषा प्रयोग करने पर जनता की #भावनाओं को बड़ी भारी आहत पहुँची है ।

उसमें कई #देशप्रेमियों ने घर पर बोर्ड लगा दिया है कि गुजरात समाचार #कुत्ता है हम घर में रहने की #परमीशन नहीं देते हैं, कई #एफआईआर करवा रहे हैं तो कई लोग उसको फोन कर रहे हैं और कई #सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर देश की जनता को #अपील कर रहे हैं कि गुजरात समाचार का #बहिष्कार करो ।

मुम्बई से विनोद बारोट की एक वीडियो वायरल हो रही है उसमें उन्होंने #सख्त गुस्सा करते हुए कहा है कि गुजरात समाचार ने हमारे देश के शहीद जवानों के लिए इतनी #घटिया भाषा का प्रयोग किया है इससे तो लगता है कि ये पेपर भारत में नहीं #बल्कि पाकिस्तान की #कराची में छप रहा है ।

उन्होंने आगे कहा कि हमारे एक भाई ने #मैनेजिंग तंत्री श्रेयंस शाह को फोन किया तो उन्होंने बताया कि इन जवानों को #शहीद नहीं बोला जायेगा इनको तो #फूंकी मार्या (जला दिया ) ही बोला जाएगा इस भाषा से आहत होकर #विनोद बरोट ने एफआईआर भी करवायी है और #देशवासियों को कहा है कि इस #पेपर को अब अपने घर में कोई नहीं #मँगवाये मै तो इस पेपर को आज से #जला देता हूँ और कभी घर में नहीं मँगवाऊँगा ।

ओम 


ओम 
जिगर मेहता ने भी #सोशल मीडिया में एक वीडियो #अपलोड किया है उसमें उन्होंने #गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा है कि मेरे #देश के जवान घर-बार छोड़कर देश की रक्षा करते हुए हुए #शहीद हो गए हैं और 26 परिवार बर्बाद हो गए हैं और #गुजरात समाचार बोलता है कि #फूंकी मार्या । क्या समझ रहा है गुजरात समाचार? इस न्यूज पेपर की इतनी #हिम्मत कैसे हुई? हमारे जवानों के खिलाफ #लिखने की । गुजरात समाचार न्यूज पेपर का #बहिष्कार करो ये भारत का नहीं पाकिस्तान का न्यूज पेपर लगता है, देश के जवानों के शहीद होने पर पाकिस्तान से भी अधिक #खुश गुजरात समाचार हुआ है, इसने #हमारे देश का और देश की रक्षा करने वाले जवानों का अपमान किया है, अब हम #सहन नही करेंगे और मैं देशवासियों से अपील करता हूँ कि इस देशविरोधी गुजरात समाचार #न्यूज पेपर का बहिष्कार करें ।

इस तरीके से अनेक लोग गुजरात समाचार का #बहिष्कार कर रहे थे ।

ऐसे एक-दो न्यूज चैनल नहीं बल्कि ऐसे कई न्यूज #चैनल हैं जो खाते है #हिन्दुस्तान का अन्न लेकिन गुणगान गाते हैं #पाकिस्तान का, नही तो जिस पाकिस्तान को हमारी सेना कई बार #धूल चटा चुकी हो उसकी औकात नही वो हमारे देश के सामने #आँख उठाकर भी देखे..

लेकिन पाकिस्तान ने अपने #हमदर्द कुछ सपोले भारत में पाल रखे हैं, इनकी #गद्दारी पाकिस्तान को मजबूती प्रदान करती है..

गड़बड़ वहाँ नही,यहाँ बैठकर पाकिस्तान का गुणगान कर रहे है गड़बड़ उनमें है ।

दो- दिन पहले #आजतक का ऑनलाइन अखबार पढ़ा उसमें लिखा था कि AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी #देशभक्त है और उनके समर्थन में कई बातें #लिखी थी । अब सवाल उठता है कि जो भारत माता की जय बोलने पर भी #इंकार करता है कि मेरा गला #काट दो लेकिन भारत माता की #जय नही बोलूँगा उसको आजतक अखबार #देशभक्त बता रहा है ।

वहीं दूसरी ओर #हिन्दू साधु-संतों, हिंदुत्वनिष्ठ #कार्यकर्ता जो देश में सुख-शांति और #समृद्धि के लिए दिन रात अथाह प्रयास करते हैं उनको #बदनाम करती है और उनके लिए ये घटिया #शब्दों का इस्तेमाल करती है ।

इससे पता चलता है कि अधिकतर #भारतीय मीडिया विदेशी #फंड से चलती है जो हमारे देश के जवानों, देश के हिन्दू साधु-संतों, हिंदुत्वनिष्ठ #कार्यकर्ताओं को बदनाम करती है और जो #देश विरोधी हैं उनका समर्थन करती है ।

अभी JNU में भी #सुकमा हमले के शहीद जवानों को एक प्रोफेसर ने #श्रद्धांजलि दी तो उन पर JNU के कुछ #स्टूडेंटों ने हमला किया फिर भी #मीडिया JNU के स्टूडेंट्स का ही पक्ष लेगी देशभक्त प्रोफेसर का नहीं ।

पाठक अब समझ गए होंगे कि भारतीय मीडिया #विदेशी फंड से चलती है जो #हिन्दुत्वनिष्ठों को बदनाम करके फिर से भारत को गुलाम बनाने की ओर जा रही है अतः हर #हिन्दुस्तानी सावधान रहें, देशविरोधी न्यूज चैनलों और पेपर का #बहिष्कार करें केवल #राष्ट्रवादी न्यूज चैनल ही देखें ।

जय हिन्द!!

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Monday, May 1, 2017

माँ गंगा के पौराणिक इतिहास एवं महत्ता


माँ गंगा जयंती : 2 मई

पौराणिक कथा के अनुसार राजा सगर ने #तपस्या करके साठ हजार पुत्रों की प्राप्ति की। एक दिन राजा #सगर ने देवलोक पर विजय प्राप्त करने के लिये एक #यज्ञ किया। यज्ञ के लिये #घोड़ा आवश्यक था जो #ईर्ष्यालु इंद्र ने चुरा लिया था। 
Ganga Jayanti

सगर ने अपने सारे पुत्रों को घोड़े की खोज में भेज दिया अंत में उन्हें घोड़ा #पाताल लोक में मिला जो एक #ऋषि के समीप बँधा था। सगर के पुत्रों ने यह सोच कर कि ऋषि ही घोड़े के #गायब होने की वजह हैं उन्होंने ऋषि का अपमान किया। तपस्या में #लीन ऋषि ने हजारों वर्ष बाद अपनी आँखें खोली और उनके क्रोध से सगर के सभी साठ हजार पुत्र जल कर वहीं #भस्म हो गये।

सगर के पुत्रों की #आत्माएँ भूत बनकर विचरने लगीं क्योंकि उनका #अंतिम संस्कार नहीं किया गया था। सगर के पुत्र #अंशुमान ने आत्माओं की मुक्ति का #असफल प्रयास किया और बाद में अंशुमान के पुत्र #दिलीप ने भी। 

भगीरथ राजा दिलीप की #दूसरी पत्नी के पुत्र थे। उन्होंने अपने #पूर्वजों का अंतिम संस्कार किया। उन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रण किया जिससे उनके #अंतिम संस्कार कर, राख को गंगाजल में #प्रवाहित किया जा सके और भटकती आत्माएं #स्वर्ग में जा सकें। भगीरथ राजा ने ब्रह्मा की घोर तपस्या की ताकि गंगा को #पृथ्वी पर लाया जा सके। ब्रह्मा प्रसन्न हुये और गंगा को पृथ्वी पर भेजने के लिये तैयार हुये और गंगा को पृथ्वी पर और उसके बाद #पाताल में जाने का आदेश दिया ताकि सगर के पुत्रों की आत्माओं की मुक्ति संभव हो सके। 

तब गंगा ने कहा कि मैं इतनी ऊँचाई से जब पृथ्वी पर #गिरूँगी, तो पृथ्वी इतना #वेग कैसे सह पाएगी? तब भगीरथ ने भगवान ₹शिव से निवेदन किया और उन्होंने अपनी खुली #जटाओं में गंगा के वेग को रोक कर, एक लट खोल दी, जिससे गंगा की अविरल धारा पृथ्वी पर प्रवाहित हुई। वह धारा भगीरथ के पीछे-पीछे गंगा सागर #संगम तक गई, जहाँ सगर-पुत्रों का #उद्धार हुआ। शिव के स्पर्श से गंगा और भी पावन हो गयी और पृथ्वी #वासियों के लिये बहुत ही श्रद्धा का केन्द्र बन गयीं। 

भारत की सबसे #महत्वपूर्ण नदी गंगा जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर 2,510 किमी की दूरी तय करती हुई #उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के #सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है, देश की प्राकृतिक संपदा ही नही, जन जन की #भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2,071 कि.मी तक भारत तथा उसके बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस लाख वर्ग किलोमीटर #क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से #अत्यंत महत्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। 100 फीट (31 मी) की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में #पवित्र मानी जाती है तथा इसकी #उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है। #भारतीय पुराण और साहित्य में अपने #सौंदर्य और महत्व के कारण बार-बार आदर के साथ #वंदित गंगा नदी के प्रति विदेशी साहित्य में भी #
प्रशंसा और भावुकतापूर्ण वर्णन किए गए हैं।

गंगा नदी पर बने पुल, बाँध और नदी #परियोजनाएँ भारत की बिजली, पानी और कृषि से संबन्धित जरुरतों को पूरा करती हैं। 

भागीरथी नदी गंगोत्री में

गंगा नदी की #प्रधान शाखा भागीरथी है जो #कुमायूँ में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर #गंगोत्री हिमनद से निकलती है।  गंगा के इस उद्गम स्थल की #ऊँचाई 3140 मीटर है। यहाँ गंगा जी को समर्पित एक #मंदिर भी है।

गंगोत्री तीर्थ, शहर से 19 कि.मी. उत्तर की ओर 3892 मी.(12,770 फी.) की ऊँचाई पर इस #हिमनद का मुख है। यह हिमनद 25 कि.मी. लंबा व 4 कि.मी. चौड़ा और लगभग 40 मी. ऊँचा है। इसी #ग्लेशियर से भागीरथी एक छोटे से #गुफानुमा मुख पर अवतरित होती है। इसका जल #स्रोत 5000 मी. ऊँचाई पर स्थित एक बेसिन है। इस #बेसिन का मूल पश्चिमी ढलान की संतोपंथ की चोटियों में है। गौमुख के रास्ते में 3600 मी. ऊँचे चिरबासा ग्राम से विशाल #गोमुख हिमनद के दर्शन होते हैं। इस हिमनद में नंदा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत का हिम #पिघल कर आता है। यद्यपि गंगा के आकार लेने में अनेक छोटी #धाराओं का योगदान है लेकिन 6 बड़ी और उनकी सहायक 5 छोटी धाराओं का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व अधिक है। 

अलकनंदा की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। धौली गंगा का अलकनंदा से #विष्णु प्रयाग में संगम होता है। यह 1372 मी. की ऊँचाई पर स्थित है। फिर 2805 मी. ऊँचे नंद प्रयाग में #अलकनन्दा का #नंदाकिनी नदी से संगम होता है। इसके बाद कर्ण प्रयाग में अलकनन्दा का कर्ण गंगा या पिंडर नदी से #संगम होता है। 

फिर #ऋषिकेश से 139 कि.मी. दूर स्थित रुद्र प्रयाग में अलकनंदा मंदाकिनी से मिलती है। इसके बाद भागीरथी व अलकनन्दा 1500 फीट पर स्थित #देव प्रयाग में संगम करती हैं यहाँ से यह सम्मलित जल-धारा गंगा नदी के नाम से आगे प्रवाहित होती है। इन पांच प्रयागों को सम्मलित रूप से #पंच प्रयाग कहा जाता है।इस प्रकार 200 कि.मी. का #संकरा पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी ऋषिकेश होते हुए प्रथम बार मैदानों का #स्पर्श हरिद्वार में करती है।

त्रिवेणी-संगम, प्रयाग

हरिद्वार से लगभग 800 कि.मी. #मैदानी यात्रा करते हुए गढ़मुक्तेश्वर, सोरों, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होते हुए गंगा #इलाहाबाद (प्रयाग) पहुँचती है। यहाँ इसका संगम #यमुना नदी से होता है। यह संगम स्थल हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है। इसके बाद हिन्दू धर्म की प्रमुख #मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी) में गंगा एक वक्र लेती है, जिससे यह यहाँ #उत्तरवाहिनी कहलाती है। यहाँ से मीरजापुर, पटना, भागलपुर होते हुए पाकुर पहुँचती है। इस बीच इसमें बहुत-सी सहायक #नदियाँ, जैसे सोन, गंडक, घाघरा, कोसी आदि मिल जाती हैं। भागलपुर में #राजमहल की पहाड़ियों से यह दक्षिणवर्ती होती है। पश्चिम बंगाल के #मुर्शिदाबाद जिले के गिरिया स्थान के पास गंगा नदी दो शाखाओं में #विभाजित हो जाती है-भागीरथी और पद्मा। भागीरथी नदी गिरिया से दक्षिण की ओर बहने लगती है जबकि पद्मा नदी दक्षिण-पूर्व की ओर बहती #फरक्का बैराज (1974 निर्मित) से छनते हुई बंगला देश में प्रवेश करती है। यहाँ से गंगा का #डेल्टाई भाग शुरू हो जाता है। मुर्शिदाबाद शहर से #हुगली शहर तक गंगा का नाम भागीरथी नदी तथा हुगली शहर से मुहाने तक गंगा का नाम #हुगली नदी है। गंगा का यह मैदान मूलत: एक भू-अभिनति गर्त है जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालय #पर्वतमाला निर्माण प्रक्रिया के तीसरे चरण में लगभग 3-4 #करोड़ वर्ष पहले हुआ था। तब से इसे #हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ लाये हुए अवसादों से पाट रही हैं। इन मैदानों में #जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर है। इस मैदान में नदी की #प्रौढ़ावस्था में बनने वाली अपरदनी और निक्षेपण स्थलाकॄतियाँ, जैसे- बालू-रोधका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित नदियाँ पाई जाती हैं।

गंगा की इस #घाटी में एक ऐसी सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ जिसका #प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और #वैभवशाली है। जहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त #संसार आलोकित हुआ। 

पाषाण या #प्रस्तर युग का जन्म और विकास यहाँ होने के अनेक #साक्ष्य मिले हैं। इसी घाटी में #रामायण और महाभारत कालीन युग का उद्भव और विलय हुआ। शतपथ ब्राह्मण, पंचविश ब्राह्मण, गौपथ ब्राह्मण, ऐतरेय आरण्यक, कौशितकी आरण्यक, सांख्यायन आरण्यक, वाजसनेयी संहिता और #महाभारत इत्यादि में वर्णित घटनाओं से #उत्तर वैदिककालीन गंगा घाटी की जानकारी मिलती है। प्राचीन मगध महाजनपद का उद्भव गंगा घाटी में ही हुआ जहाँ से #गणराज्यों की परंपरा विश्व में पहली बार प्रारंभ हुई। यहीं भारत का वह स्वर्ण युग विकसित हुआ जब मौर्य और गुप्त वंशीय राजाओं ने यहाँ #शासन किया।


सुंदरवन-विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा-गंगा का #मुहाना-बंगाल की खाड़ी में है ।

हुगली नदी कोलकाता, हावड़ा होते हुए #सुंदरवन के भारतीय भाग में सागर से #संगम करती है। #पद्मा में ब्रह्मपुत्र से निकली शाखा नदी जमुना नदी एवं मेघना नदी मिलती हैं। अंततः ये 350 कि.मी. चौड़े सुंदरवन डेल्टा में जाकर #बंगाल की खाड़ी में सागर-संगम करती है। यह #डेल्टा गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई नवीन #जलोढ़ से 1,000 वर्षों में निर्मित समतल एवं निम्न मैदान है। यहाँ #गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ है जिसे #गंगा-सागर-संगम कहते हैं।


गोमुख पर शुद्ध गंगा

गंगा नदी विश्व भर में अपनी #शुद्धीकरण क्षमता के कारण जानी जाती है। लंबे समय से प्रचलित इसकी शुद्धीकरण की मान्यता का #वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस नदी के जल में #बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। नदी के जल में #प्राणवायु (ऑक्सीजन) की मात्रा को बनाए रखने की #असाधारण क्षमता है। किंतु इसका कारण अभी तक अज्ञात है। एक राष्ट्रीय सार्वजनिक #रेडियो कार्यक्रम के अनुसार इस कारण हैजा और पेचिश जैसी #बीमारियाँ होने का खतरा बहुत ही कम हो जाता है, जिससे #महामारियाँ होने की संभावना बड़े स्तर पर टल जाती है। 

लेकिन गंगा के तट पर घने बसे #औद्योगिक नगरों के #नालों की गंदगी सीधे गंगा नदी में मिलने से गंगा का प्रदूषण पिछले कई सालों से #चिंता का विषय बना हुआ है। औद्योगिक कचरे के साथ-साथ #प्लास्टिक कचरे की #बहुतायत ने गंगा जल को भी बेहद प्रदूषित किया है। 

वैज्ञानिक जांच के अनुसार गंगा का #बायोलाजिकल ऑक्सीजन स्तर 3 डिग्री (सामान्य) से बढ़कर 6 डिग्री हो चुका है। 

गंगा में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा #प्रतिदिन गिर रहा है।  यह घोर #चिन्तनीय है कि कब गंगा-जल की सफाई पूर्ण होगी । गंगा नदी की सफाई के लिए कई बार पहल की गयी लेकिन कोई भी #संतोषजनक स्थिति तक नहीं पहुँच पाया। 

वाराणसी घाट 

भारत की अनेक #धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया गया है। बहुत से पवित्र #तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं । जिनमें वाराणसी और #हरिद्वार सबसे प्रमुख हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है एवं  गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे #पापों का नाश हो जाता है । गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त #संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक #अमृत माना गया है। 

महाभारत के अनुसार मात्र प्रयाग में माघ मास में #गंगा-यमुना के संगम पर तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का संगम होता है। ये तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में #सांस्कृतिक एकता स्थापित करते हैं। 

माँ गंगा की अपार महिमा

भारत की राष्ट्र-नदी गंगा जल ही नहीं, अपितु भारत और #हिंदी साहित्य की #मानवीय चेतना को भी प्रवाहित करती है। ऋग्वेद, महाभारत, रामायण एवं अनेक पुराणों में #गंगा को पुण्य सलिला, पाप-नाशिनी, मोक्ष प्रदायिनी, सरित्श्रेष्ठा एवं महानदी कहा गया है।

जैसे मंत्रों में #ॐकार, स्त्रियों में #गौरीदेवी, तत्वों में #गुरुतत्व और विद्याओं में #आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में #गंगातीर्थ विशेष माना गया है । गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया है :

संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते । तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः ।।

‘देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करनेवाली हैं । आप जीवनरूपा हैं । आप आधिभौतिक,आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करनेवाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है ।’  

(स्कंद पुराण, काशी खं. पू. : 27.160)

जिस दिन #गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी - 2 मई) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर #अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी - 4 जून) के नाम से जाना जाता है । इन दिनों में गंगाजी में #गोता मारने से विशेष #सात्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है । वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की #अमावस्या तथा #कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष #पुण्यलाभ होता है ।

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